संसद की सीढ़ियों पर लोकतंत्र की रात, सांसदों ने रातभर दिया धरना

संसद की सीढ़ियों पर लोकतंत्र की रात, सांसदों ने रातभर दिया धरना

नई दिल्ली, 19 दिसंबर 2025 । संसद परिसर में उस समय असाधारण दृश्य देखने को मिला, जब विभिन्न दलों के सांसदों ने संसद भवन की सीढ़ियों पर रातभर धरना दिया। यह विरोध प्रदर्शन संसद की कार्यवाही, कथित पक्षपातपूर्ण रवैये और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा न होने के विरोध में किया गया। देर रात तक जारी इस धरने ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया तथा लोकतांत्रिक विरोध के नए संकेत दिए।

VB-G RAM G बिल पास होने के साथ संसद का सत्र शुक्रवार को खत्म हो गया। इस पर बिल पर लोकसभा में 18 घंटे और राज्यसभा में 14 घंटे चर्चा हुई। दोनों ही सदन में विपक्ष ने बायकॉट कर दिया।

TMC सांसद, संसद के मकर द्वार पर रातभर से धरने पर बैठे रहे। बीच-बीच में हम होंगे कामयाब गाना भी गाया।

सत्र खत्म होने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में चाय पर चर्चा हुई जिसमें पीएम मोदी-प्रियंका समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। इस दौरान सभी ठहाका लगाते हुए दिखे।

धरने में शामिल सांसदों का कहना था कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है, लेकिन जब जनहित के सवालों को लगातार नजरअंदाज किया जाता है, तो विरोध दर्ज कराना जरूरी हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है और नियमों का चयनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी के विरोध में सांसदों ने शांतिपूर्ण ढंग से संसद की सीढ़ियों पर बैठकर पूरी रात गुजारने का फैसला किया।

रात के समय भी संसद परिसर में नारेबाजी और पोस्टर के जरिए सांसद अपनी मांगें उठाते रहे। कुछ सांसदों ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की बात कही, तो कुछ ने मीडिया से बातचीत में इसे मजबूरी में उठाया गया कदम बताया। उनका कहना था कि संसद के भीतर जब संवाद के रास्ते बंद हो जाएं, तो बाहर आकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना ही अंतिम विकल्प बचता है।

इस धरने को लेकर सत्तापक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक ड्रामा है और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उनका तर्क था कि सदन में चर्चा के पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन विपक्ष ने जानबूझकर कार्यवाही बाधित की। वहीं विपक्षी दलों ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह लड़ाई सत्ता बनाम विपक्ष की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और जवाबदेही की है।