बिजली व्यवस्था में डिजिटल क्रांति—स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ताओं को मिलेगा पारदर्शी और नियंत्रित उपयोग का फायदा
उत्तर प्रदेश, 01 अप्रैल 2026 । उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का अभियान तेज कर दिया गया है। अब तक राज्य में 44 हजार से अधिक पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे बिजली उपभोग और बिलिंग प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर राजेश कुमार ने बताया कि पूरे जोन में लगभग तीन लाख उपभोक्ता हैं, जिनमें 80 प्रतिशत घरेलू और 20 प्रतिशत व्यावसायिक उपभोक्ता शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अगले छह महीनों में सभी पुराने मीटरों को बदलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी जीएमआर कंपनी को सौंपी गई है।
इस नई प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को पहले से ही बिजली का रिचार्ज करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे मोबाइल फोन रिचार्ज किया जाता है। इससे उपभोक्ता अपनी खपत पर बेहतर नियंत्रण रख सकेंगे और अनावश्यक बिजली खर्च से बच पाएंगे।
Uttar Pradesh सरकार का मानना है कि स्मार्ट मीटर से बिलिंग में पारदर्शिता, लाइन लॉस में कमी और राजस्व वसूली में सुधार होगा। इसके साथ ही मीटर रीडिंग की जरूरत खत्म हो जाएगी और रियल-टाइम डेटा के जरिए खपत की निगरानी संभव हो सकेगी।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर में मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बैलेंस और उपयोग की जानकारी भी मिलती रहेगी। बैलेंस खत्म होने से पहले ही उपभोक्ताओं को अलर्ट मिल जाएगा, जिससे अचानक बिजली कटने की समस्या से बचा जा सकेगा।
हालांकि, कुछ उपभोक्ताओं ने इस नई प्रणाली को लेकर चिंता भी जताई है, खासकर उन लोगों ने जो नियमित रिचार्ज और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने में सहज नहीं हैं। सरकार का कहना है कि इसके लिए जागरूकता अभियान और सहायता केंद्र भी शुरू किए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, Uttar Pradesh में स्मार्ट प्रीपेड मीटर का यह अभियान बिजली सेक्टर में सुधार और उपभोक्ताओं को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


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