अल फलाह यूनिवर्सिटी में डॉ. निसार की पत्नी-बेटी हाउस अरेस्ट

अल फलाह यूनिवर्सिटी में डॉ. निसार की पत्नी-बेटी हाउस अरेस्ट

फरीदाबाद, 18 नवम्बर 2025 । अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े एक चर्चित मामले ने नया मोड़ ले लिया है, जब विश्वविद्यालय से निलंबित किए गए डॉ. निसार के परिवार को—विशेष रूप से उनकी पत्नी और बेटी को—घर में नज़रबंद (हाउस अरेस्ट) किए जाने की जानकारी सामने आई। यह कार्रवाई प्रशासनिक एवं सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदमों के बाद चर्चा का विषय बन गई है, और इसने न केवल शैक्षणिक जगत बल्कि मानवाधिकार संगठनों को भी चिंता में डाल दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. निसार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन और कुछ सरकारी एजेंसियों ने गंभीर अनियमितताओं और विवादित गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए थे। इस मामले की जांच पहले से चल रही थी, लेकिन पिछले 48 घंटों में स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। जैसे ही अधिकारियों ने डॉ. निसार को हिरासत में लिया, उसी समय उनकी पत्नी और बेटी को उनके आवास पर सीमित कर दिया गया—अर्थात बिना अनुमति घर से बाहर निकलने की छूट नहीं दी गई।

परिवार का कहना है कि यह कदम न तो आवश्यक था और न ही कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप। डॉ. निसार की पत्नी ने आरोप लगाया कि उन्हें न तो कोई आधिकारिक नोटिस दिया गया और न ही यह बताया गया कि उन्हें हाउस अरेस्ट क्यों किया गया है। बेटी का कहना है कि यह मानसिक उत्पीड़न जैसा है और परिवार को जानबूझकर दबाव में लाने का प्रयास है।

दूसरी ओर, सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि मामला संवेदनशील है और जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक परिवार के किसी भी सदस्य की बाहरी संपर्क गतिविधियों पर निगरानी जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह "रूटीन प्रोसीजर" नहीं है, बल्कि “सिचुएशनल प्रीकॉशन” है।

इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर और शिक्षकों के संगठनों में आक्रोश पैदा कर दिया है। कई प्रोफेसरों ने कहा है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान से जुड़े विवाद में परिवार को इस तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए, जब तक कि उनके खिलाफ कोई सीधा आरोप न हो। कई छात्र संगठनों ने भी इसे “अत्यधिक और असंवैधानिक कार्रवाई” बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने और परिवार को सामान्य जीवन जीने देने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाइयाँ न्याय प्रणाली और नागरिक स्वतंत्रता की भावना के खिलाफ हैं।

मामला फिलहाल जांच के अधीन है, लेकिन जिस तरह से डॉ. निसार और उनके परिवार पर कार्रवाई की गई है, उसने शिक्षा जगत, कानून विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के बीच व्यापक चर्चा छेड़ दी है। आने वाले दिनों में प्रशासन की अगली कार्रवाई और न्यायिक दखल से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।