दिल्ली में ई-रिक्शा किराए में बढ़ोतरी, आज से नई दरें लागू—आम यात्रियों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

दिल्ली में ई-रिक्शा किराए में बढ़ोतरी, आज से नई दरें लागू—आम यात्रियों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

नई दिल्ली, 01 मई 2026 । राजधानी Delhi में आज से ई-रिक्शा का सफर महंगा हो गया है। नई दरों के लागू होते ही यात्रियों को अब पहले के मुकाबले ज्यादा किराया देना पड़ेगा। 1 मई से दिल्ली में ई-रिक्शा का न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये कर दिया गया है। किराये में सीधे 100 प्रतिशत की इस वृद्धि का सीधा असर उन लोगों की जेब पर पड़ेगा जो मेट्रो स्टेशनों या बस स्टैंडों से अपने घर या ऑफिस जाने के लिए ई-रिक्शा का सहारा लेते हैं।

इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन ने लिया फैसला

ई-रिक्शा के किराये में बढ़ोतरी का यह निर्णय इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन द्वारा लिया गया है। फेडरेशन का तर्क है कि साल 2010 के बाद से ई-रिक्शा के किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी, जबकि इस दौरान ऑटो और टैक्सी के दाम दो बार बढ़ाए जा चुके हैं। चालकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और मेंटेनेंस के खर्च को देखते हुए पुराना किराया काफी कम था।

इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह बढ़ती महंगाई, बैटरी और रखरखाव की लागत में इजाफा, और ड्राइवरों की आय में सुधार की मांग को बताया जा रहा है। ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से खर्च लगातार बढ़ रहे थे, लेकिन किराया लंबे समय से स्थिर था, जिससे उनकी आमदनी पर असर पड़ रहा था।

नई दरों के अनुसार, न्यूनतम किराए में बढ़ोतरी के साथ-साथ दूरी के हिसाब से किराया भी बढ़ाया गया है। हालांकि, सटीक रेट अलग-अलग क्षेत्रों और दूरी के आधार पर थोड़ा अलग हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर हर यात्रा पर यात्रियों को पहले से ज्यादा भुगतान करना होगा।

यात्रियों के लिए यह फैसला राहत भरा नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना छोटे-छोटे सफर के लिए ई-रिक्शा पर निर्भर रहते हैं। छात्रों, कामकाजी लोगों और बुजुर्गों के लिए यह बढ़ोतरी सीधे उनके मासिक खर्च को प्रभावित कर सकती है।

दूसरी ओर, विशेषज्ञों का मानना है that यह कदम ई-रिक्शा चालकों के लिए जरूरी था ताकि वे अपने बढ़ते खर्चों को संतुलित कर सकें और बेहतर सेवा दे सकें। साथ ही, यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि किराया बढ़ने के बावजूद यह परिवहन का किफायती विकल्प बना रहेगा।

कुल मिलाकर, यह बदलाव जहां एक ओर चालकों को राहत देगा, वहीं दूसरी ओर आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का शहर की यातायात व्यवस्था और यात्रियों के व्यवहार पर क्या असर पड़ता है।