EV बैटरियों पर लगेगा 21 अंकों का यूनिक नंबर, सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी होगी और मजबूत

EV बैटरियों पर लगेगा 21 अंकों का यूनिक नंबर, सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी होगी और मजबूत

नई दिल्ली, 03 जनवरी 2026 । इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब देश में इस्तेमाल होने वाली EV बैटरियों पर 21 अंकों का यूनिक पहचान नंबर अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा। इस यूनिक नंबर के जरिए हर बैटरी की पहचान, ट्रैकिंग और निगरानी आसान हो जाएगी। इसका उद्देश्य न सिर्फ उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ाना है, बल्कि बैटरी निर्माण, सप्लाई और उपयोग से जुड़ी पूरी चेन को ज्यादा जवाबदेह बनाना भी है।

मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बैटरियों की पहचान और उनकी ट्रैकिंग के लिए एक नया सिस्टम तैयार किया है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि देश में हर EV बैटरी का अपना एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर होगा। जिसे 'बैटरी पैक आधार नंबर' (BPAN) कहा जाएगा।

यह नंबर 21 अंकों का होगा, जिससे बैटरी के बनने से लेकर उसके खराब होने या रिसाइकिल होने तक की पूरी जानकारी एक क्लिक पर मिल सकेगी।

बैटरी पर 21 अंकों का यूनिक नंबर अनिवार्य होगा

मिनिस्ट्री की जारी ड्राफ्ट गाइडलाइंस के अनुसार, बैटरी बनाने वाली कंपनियों और इन्हें इंपोर्ट करने वालों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे हर बैटरी पैक को एक 21-कैरेक्टर का BPAN असाइन करें।

यह नियम न केवल बाजार में बेची जाने वाली बैटरियों पर, बल्कि कंपनियों के खुद के इस्तेमाल के लिए बनाई गई बैटरियों पर भी लागू होगा।

सरकार और नियामक एजेंसियों का मानना है कि 21 अंकों का यह यूनिक कोड बैटरी से जुड़ी सुरक्षा जांच और रिकॉल प्रक्रिया को भी आसान बनाएगा। अगर किसी खास बैच की बैटरियों में खराबी पाई जाती है, तो उस बैच की पहचान कर उन्हें जल्दी बाजार से हटाया जा सकेगा। इससे बड़े हादसों की आशंका कम होगी और उपभोक्ताओं का EV तकनीक पर भरोसा बढ़ेगा।

EV मैन्युफैक्चरर्स और बैटरी कंपनियों के लिए यह बदलाव अहम माना जा रहा है। उन्हें अब अपनी बैटरियों के डेटा को डिजिटल रूप से दर्ज करना होगा और हर बैटरी को इस यूनिक नंबर से जोड़ना होगा। हालांकि शुरुआती दौर में इससे कंपनियों की लागत और प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे गुणवत्ता नियंत्रण और ब्रांड विश्वसनीयता को फायदा मिलने की उम्मीद है।

उपभोक्ताओं के लिहाज से भी यह कदम फायदेमंद साबित होगा। वाहन खरीदते समय ग्राहक बैटरी की असली पहचान, वारंटी और इतिहास को आसानी से सत्यापित कर सकेंगे। साथ ही सेकेंड हैंड EV बाजार में भी यह यूनिक नंबर पारदर्शिता लाने में मदद करेगा, जिससे धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।

कुल मिलाकर, EV बैटरियों पर 21 अंकों का यूनिक नंबर लगाने का फैसला देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सुरक्षित, भरोसेमंद और संगठित बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। इससे न सिर्फ EV इकोसिस्टम मजबूत होगा, बल्कि भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार भी तेज हो सकती है।