FATF की रिपोर्ट में भारत की बड़ी उपलब्धि – मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ED की कार्रवाई की तारीफ़

FATF की रिपोर्ट में भारत की बड़ी उपलब्धि – मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ED की कार्रवाई की तारीफ़

नई दिल्ली, 05 नवम्बर 2025 । ग्लोबल फाइनेंशियल वॉचडॉग FATF (Financial Action Task Force) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में भारत की मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों की सराहना की है। रिपोर्ट में विशेष तौर पर कहा गया कि भारत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर बेनामी लेन-देन, हवाला नेटवर्क, आतंकियों की फंडिंग और संगठित वित्तीय अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की है।

मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ भारत की सख्त कार्रवाई की इंटरनेशनल लेवल पर सराहना हुई है। वैश्विक निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने अपनी रिपोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के काम को एक प्रभावशाली वैश्विक मॉडल बताया है।

रिपोर्ट में FATF ने कहा कि भारत की कानूनी व्यवस्था और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम तंत्र मजबूत और भरोसेमंद है। यह प्रणाली अपराध से जुड़ी संपत्ति को जब्त करने और पीड़ितों को राहत दिलाने के मामले में अन्य देशों के लिए मिसाल बन गई है।

रिपोर्ट में महाराष्ट्र के एक मामले का जिक्र है, जिसमें अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्तियों को जब्त कर पीड़ितों को लौटाया गया। FATF ने कहा कि भारत ने वित्तीय अपराधों से जब्त संपत्तियों को समाजहित में उपयोग करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

संस्था के मुताबिक, भारत का यह मॉडल अन्य देशों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है। FATF ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (2018) को संपत्ति वसूली और प्रबंधन का एक प्रभावी और व्यापक मॉडल बताया है।

FATF रिपोर्ट में जांच के कई उदाहरण शामिल

रिपोर्ट में ED के कई प्रमुख मामलों का उल्लेख है, जिनमें करीब 17520 करोड़ रुपए के रोज वैली पोंजी घोटाले में पीड़ितों को संपत्ति लौटाना और भारत-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई में 268 बिटकॉइन (करीब 130 करोड़ रुपए मूल्य) और 10 लाख डॉलर की संपत्तियों की जब्ती शामिल है।

इसके अलावा, आंध्र प्रदेश पुलिस सीआईडी के साथ मिलकर 6,000 करोड़ रुपए की संपत्तियों की बहाली, और PMLA के तहत 17.77 अरब रुपए की अचल संपत्ति जब्त करने जैसे उदाहरण भी रिपोर्ट में दर्ज हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत का वित्तीय निगरानी ढांचा अब पहले की तुलना में ज़्यादा मजबूत है और यह विश्व स्तर पर आर्थिक अपराधों से मुकाबला करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

सरकार ने FATF की प्रशंसा को “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विश्वसनीयता का प्रमाण” बताया। वित्त मंत्रालय ने कहा कि आने वाले समय में डिजिटल फाइनेंस, क्रिप्टो करेंसी और सीमा-पार मनी ट्रांसफर जैसे क्षेत्रों में और कड़े नियम लाए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि FATF की यह रिपोर्ट भारत की विदेशी निवेश विश्वसनीयता बढ़ा सकती है, क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग पर नियंत्रण किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है।