फोकस: एशियन एक्वाटिक्स चैंपियनशिप में विवाद — निष्पक्षता पर उठे सवाल, खेल भावना पर पड़ा असर
नई दिल्ली, एशियन एक्वाटिक्स चैंपियनशिप में इस बार खेल से ज़्यादा विवादों ने सुर्खियां बटोरी हैं। आयोजन के तीसरे दिन शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी प्रतियोगिता पर सवाल खड़े कर रहा है। कई देशों ने निर्णायकों के फैसलों और जजिंग प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। विशेष रूप से कल हुए सिंक्रोनाइज़्ड स्विमिंग और डाइविंग इवेंट्स में निर्णयों को लेकर खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन ने नाराज़गी जताई।
अहमदाबाद में चल रही एशियन एक्वाटिक्स चैंपियनशिप के दौरान भारत की मेंस वॉटर पोलो टीम विवादों में घिर गई है। मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों के स्विमिंग ट्रंक (तैराकी की आधिकारिक ड्रेस) पर भारत का तिरंगा लगा हुआ था।
इसे लेकर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप लगे हैं। नियमों के अनुसार, ध्वज को स्विमिंग कैप पर लगाया जाना चाहिए था।
मंत्रालय और IOA ने रिपोर्ट मांगी खेल मंत्रालय और भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) ने स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों ने कहा कि खिलाड़ियों को तिरंगा ट्रंक पर नहीं, बल्कि कैप पर लगाना चाहिए था।
भारतीय कानून का उल्लंघन यह विवाद मुख्य रूप से भारत के ध्वज संहिता 2002 और प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ के उल्लंघन से जुड़ा है। जो राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और उपयोग को लेकर सख्त नियम लागू करता है।
इन नियमों के अनुसार:
- राष्ट्रीय ध्वज को कमर के नीचे पहने जाने वाले कपड़ों पर लगाना वर्जित है।
- तिरंगे का डिजाइन अंडरगारमेंट्स, कुशन, नैपकिन या रूमाल जैसी वस्तुओं पर छापना या कढ़ाई करना गैरकानूनी है।
- झंडे को जमीन पर गिराना या पानी में डुबोना भी अपमानजनक कृत्य माना जाता है।
IOC चार्टर क्या कहता है? इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (IOC) के चार्टर के अनुसार, खिलाड़ियों या टीमों के लिए राष्ट्रीय झंडा लगाना अनिवार्य नहीं है। यह पूरी तरह खिलाड़ियों और उनके देश की पसंद पर निर्भर करता है।
वर्ल्ड एक्वाटिक्स का नियम क्या कहता है? SFI ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ल्ड एक्वाटिक्स (पहले FINA) के नियमों के अनुसार ही कार्य किया। इन नियमों के मुताबिक, आप अपने देश के झंडे को स्विमिंग किट पर कही भी लगा सकते हो। वहीं भारतीय संविधान के अनुसार, टूर्नामेंट में देश का झंडा और कोड स्विम कैप पर 32 वर्ग सेंटीमीटर तक के आकार में लगाया जा सकता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आयोजन समिति इन विवादों को कैसे सुलझाती है और क्या निष्पक्षता बहाल करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं। एशियन एक्वाटिक्स चैंपियनशिप का यह विवाद यह याद दिलाता है कि खेल केवल प्रतिभा का नहीं, बल्कि ईमानदारी और पारदर्शिता का भी मंच होता है।


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