गृह मंत्रालय का बड़ा बयान — जनगणना 2027 के दूसरे चरण में होगी जाति जनगणना
नई दिल्ली, 28 जनवरी 2026 । केंद्र सरकार की ओर से जनगणना 2027 को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत सामने आया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, आगामी जनगणना प्रक्रिया के दूसरे चरण में जाति से संबंधित आंकड़ों का संकलन भी शामिल किया जाएगा। यह कदम सामाजिक, आर्थिक और नीतिगत दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से देश में व्यापक स्तर पर जातिगत डेटा अपडेट करने की मांग उठती रही है।
गृह मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जाति जनगणना भी की जाएगी। सरकार ने कहा कि देश भर में फरवरी 2027 से जनगणना शुरू हो जाएगी।
गृह मंत्रालय ने कहा कि जनगणना 2027 के बारे में पूरी जानकारी 12 दिसंबर, 2025 को एक प्रेस नोट के माध्यम से जारी की गई थी। फिर भी, कुछ लोग जानबूझकर जनगणना-2027 और विशेष रूप से जाति जनगणना के बारे में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल, सपा चीफ अखिलेश यादव ने x पर एक पोस्ट में दावा किया था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का जाति जनगणना कराने का कोई इरादा नहीं है। पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को धोखा दिया है।जनगणना नोटिफिकेशन में जाति के लिए कोई कॉलम ही नहीं है।
मंत्रालय ने आगे बताया कि जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके क्षेत्रों और गैर-समकालिक क्षेत्रों सितंबर, 2026 में ही इसे पूरा किया जाएगा।
हालांकि, जाति जनगणना हमेशा से एक संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा है। समर्थकों का तर्क है कि सटीक डेटा से सामाजिक न्याय मजबूत होगा, जबकि आलोचकों को आशंका रहती है कि इससे पहचान आधारित राजनीति को बढ़ावा मिल सकता है। इसीलिए सरकार के सामने चुनौती होगी कि डेटा संग्रह प्रक्रिया पारदर्शी, तकनीकी रूप से सटीक और सामाजिक रूप से संतुलित रहे।
जनगणना 2027 को डिजिटल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की भी योजना है, जिसमें मोबाइल ऐप, ऑनलाइन डेटा संग्रह और जियो-टैगिंग जैसी प्रणालियाँ शामिल हो सकती हैं। इससे डेटा की शुद्धता और प्रक्रिया की गति बढ़ने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, यदि यह कदम लागू होता है, तो यह सिर्फ सांख्यिकीय अभ्यास नहीं बल्कि भारत की सामाजिक संरचना को समझने और नीतियों को पुनर्संतुलित करने का आधार बन सकता है।


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