भारत-अमेरिका ने किया 10 साल का डिफेंस एग्रीमेंट: रणनीतिक साझेदारी का नया युग शुरू
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 25 । भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दोनों देशों ने 10 साल के दीर्घकालिक रक्षा समझौते (Defence Cooperation Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, इंटेलिजेंस शेयरिंग, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक स्थिरता को और मजबूत करेगा।
नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया। दोनों नेताओं ने इसे “21वीं सदी की सबसे विश्वसनीय रक्षा साझेदारी” बताया।
भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को एक नया 10 साल का रक्षा (डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) समझौता किया है। इसका मतलब है कि आने वाले 10 सालों तक दोनों देश मिलकर अपनी सेनाओं, रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेंगे।
इसके तहत अमेरिका, भारत से एडवांस टेक्नोलॉजी शेयर करेगा, जिससे एडवांस ड्रोन और AI हथियारों पर जॉइंट रिसर्च में मदद मिलेगी।
यह समझौता 31 अक्टूबर को कुआलालंपुर (मलेशिया) में हुआ, जहां दोनों देश ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) में शामिल थे। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस समझौते पर दस्तखत किए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समझौते से 4 बड़े फायदे होंगे।
- सैन्य सहयोग बढ़ेगा- दोनों देशों की सेनाएं मिलकर ट्रेनिंग और सेनाभ्यास करेंगी।
- जॉइंट प्रोडक्शन- यानी दोनों देश मिलकर हथियार, रक्षा उपकरण और नई तकनीक बनाएंगे।
- टेक्नोलॉजी साझाकरण- अमेरिका भारत को अपनी कुछ एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी शेयर करेगा।
- सूचना और खुफिया जानकारी साझा- दोनों देशों की एजेंसियां एक-दूसरे से सुरक्षा जानकारियां साझा करेंगी।
अमेरिकी रक्षामंत्री बोले- हमारी साझेदारी मजबूत होगी
अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने X पर लिखा- मैंने राजनाथ सिंह के साथ 10 साल का अमेरिका-भारत रक्षा समझौता साइन किया है। यह हमारी साझेदारी को और मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच समन्वय, जानकारी साझा करने और तकनीकी सहयोग का नया दौर शुरू हो रहा है।
समझौता साइन होने के बाद हेगसेथ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को शुक्रिया कहा। उन्होंने बताया कि यह रिश्ता दुनिया के सबसे अहम रिश्तों में से एक है। दोनों देश एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं और इंडो-पेसिफिक इलाके में सुरक्षा व खुशहाली चाहते हैं।


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