चाबहार पोर्ट पर भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट — क्षेत्रीय सहयोग और रणनीतिक संतुलन की दिशा में बड़ा कदम
वाशिंगटन , 30 अक्टूबर 25 । अंतरराष्ट्रीय संबंधों के परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण विकास के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को ईरान के चाबहार पोर्ट परियोजना पर लगाए गए प्रतिबंधों से छूट प्रदान की है। यह निर्णय न केवल भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रतीक है, बल्कि दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच रणनीतिक और आर्थिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।
चाबहार बंदरगाह, जो ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है, भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इस पोर्ट के माध्यम से भारत को पाकिस्तान को बाईपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा पहुँच मार्ग मिलता है।
अमेरिकी सरकार ने भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंधों से छह महीने के लिए रियायत दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी।
इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि वो 29 सितंबर से इस बंदरगाह को चलाने, पैसे देने या उससे जुड़े किसी काम में शामिल कंपनियों पर जुर्माना लगाएगा। हालांकि बाद में इस छूट को बढ़ाकर 27 अक्टूबर कर दिया गया था, जिसकी मियाद 3 दिन पहले खत्म हुई थी। अब इसे 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।
भारत ने 2024 में चाबहार को 10 साल के लिए लीज पर लिया है। इसके तहत भारत यहां 120 मिलियन डॉलर निवेश करेगा और 250 मिलियन डॉलर का क्रेडिट लाइन (सस्ता कर्ज) देगा।
चाबहार बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से सीधे व्यापार करने में मदद करता है।
चाबहार पोर्ट को छूट से भारत को 4 बड़े फायदे
1. बिना पाकिस्तान के रास्ते मध्य एशिया तक पहुंच
- अब भारत को अफगानिस्तान या दूसरे एशियाई देशों तक सामान भेजने के लिए पाकिस्तान के रास्ते से नहीं जाना पड़ेगा।
- भारत ईरान के चाबहार पोर्ट से सीधा अपना माल अफगानिस्तान और मध्य एशिया भेज सकता है। इससे समय और पैसा दोनों बचेंगे।
2. व्यापार बढ़ेगा
- भारत अब चाबहार के जरिए अपने सामान, दवाएं, फूड और इंडस्ट्रीयल प्रोडक्ट आसानी से दूसरे देशों तक भेज सकेगा।
- इससे भारत का एक्सपोर्ट बढ़ेगा और लॉजिस्टिक खर्च (ढुलाई खर्च) कम होगा।
- भारत को ईरान से तेल खरीदने में आसानी होगी। दोनों देश मिलकर चाबहार को एक ट्रेड हब बना सकते हैं।
3. भारत का निवेश सुरक्षित रहेगा
- भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास में काफी पैसा और संसाधन लगाए हैं।
- अमेरिका की छूट से अब भारत अपने प्रोजेक्ट को बिना रुकावट के आगे बढ़ा सकेगा।
4. चीन-पाकिस्तान का काउंटर
- चाबहार बंदरगाह, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट (जहां चीन निवेश कर रहा है) के नजदीक है।
- इसलिए यह पोर्ट भारत को रणनीतिक रूप से मजबूत बनाता है और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को काउंटर करने में मदद करता है।
भारत चाबहार से अफगानिस्तान को जरूरी सामन भेजता है
पहले भारत को अफगानिस्तान माल भेजने के लिए पाकिस्तान से गुजरना पड़ता था, लेकिन सीमा विवाद के कारण यह मुश्किल था। चाबहार ने यह रास्ता आसान बनाया। भारत इस बंदरगाह से अफगानिस्तान को गेहूं भेजता है और मध्य एशिया से गैस-तेल ला सकता है।
2018 में भारत और ईरान ने चाबहार विकसित करने का समझौता किया था। अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारत को कुछ प्रतिबंधों में छूट दी थी। यह बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, जिसे चीन बना रहा है, के मुकाबले भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह छूट भारत की "कनेक्ट सेंट्रल एशिया" नीति को मजबूत करेगी और भारत को क्षेत्रीय व्यापारिक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसके अलावा, यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में संतुलन की नीति को भी प्रतिबिंबित करती है।
चाबहार पोर्ट अब केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि भारत की कूटनीतिक कुशलता और वैश्विक प्रभावशक्ति का प्रतीक बनता जा रहा है।


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