अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल: दावा—ट्रम्प वेनेजुएला के खिलाफ जंग की घोषणा कर सकते हैं
वॉशिंगटन , 18 दिसंबर 2025 । अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला के खिलाफ जंग की घोषणा जैसा सख्त कदम उठा सकते हैं। इस अटकल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और लैटिन अमेरिका से लेकर वॉशिंगटन तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
अमेरिकी ब्रॉडकास्टर टकर कार्लसन ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला के साथ युद्ध की घोषणा कर सकते हैं। टकर कार्लसन ने यह बात अपने ऑनलाइन शो ‘जजिंग फ्रीडम’ में कही।
उनके मुताबिक, एक अमेरिकी सांसद ने उन्हें बताया कि सांसदों को ट्रम्प के संबोधन से पहले एक बंद कमरे में ब्रीफिंग दी गई थी। इस ब्रीफिंग में कहा गया कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बन सकती है और राष्ट्रपति इसे भाषण में सार्वजनिक कर सकते हैं।
यह दावा ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वेनेजुएला हमारे तेल और ऊर्जा अधिकारों को वापस जिन्हें अवैध रूप से छीन लिया गया था।
ट्रम्प ने कहा कि वेनेजुएला ने 1976 में अमेरिकी तेल कंपनियों को जबरन भगाया था और उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली थी।
वेनेजुएला के तेल टैंकरों पर ट्रम्प की नाकाबंदी
ट्रम्प ने वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाते हुए प्रतिबंधित तेल टैंकरों के वेनेजुएला आने-जाने पर पूरी नाकाबंदी का आदेश दिया है।
ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा कि वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ी नौसेना घेराबंदी से घिरा हुआ है। यह घेराबंदी और बढ़ेगी, जब तक कि वेनेजुएला अमेरिका से चुराए गए तेल, जमीन और दूसरी संपत्तियों को वापस नहीं लौटाता।
वेनेजुएला लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहा है। अमेरिका पहले ही वहां की सरकार पर लोकतंत्र कमजोर करने और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई न सिर्फ क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा असर डालेगी।
अमेरिका के भीतर भी इस संभावित कदम को लेकर मतभेद देखे जा रहे हैं। कुछ राजनीतिक धड़े इसे अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन मानते हैं, जबकि अन्य इसे अनावश्यक युद्ध और वैश्विक तनाव बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं। कांग्रेस और रक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि सैन्य टकराव की बजाय कूटनीतिक समाधान ही बेहतर विकल्प हो सकता है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये दावे कितने ठोस हैं और ट्रम्प वास्तव में ऐसा कोई कदम उठाएंगे या नहीं। लेकिन इतना तय है कि इस तरह की अटकलों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में ट्रम्प के आधिकारिक बयान और अमेरिकी नीति की दिशा पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।


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