ASP अनुज पर FIR का आदेश देने वाले जज हटे: प्रशासनिक फैसले से बढ़ी हलचल, मामला फिर चर्चा में

ASP अनुज पर FIR का आदेश देने वाले जज हटे: प्रशासनिक फैसले से बढ़ी हलचल, मामला फिर चर्चा में

संभल, 21 जनवरी 2026 । ASP अनुज पर FIR दर्ज करने का आदेश देने वाले जज को उनके पद से हटा दिया गया है। इस फैसले के बाद न्यायिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जज के हटाए जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह फैसला किन परिस्थितियों में लिया गया।

जानकारी के मुताबिक, ASP अनुज के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश के बाद से ही मामला लगातार सुर्खियों में था। आदेश को लेकर न सिर्फ कानूनी हलकों में, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी असहमति की बातें सामने आ रही थीं। अब जज को हटाए जाने के फैसले ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार की शाम बड़ा फेरबदल किया। 14 जजों के तबादले कर दिए हैं। लिस्ट में तीन जिला जज स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल सर्विसेज रजनीश कुमार की ओर से लिस्ट जारी की गई है।

लिस्ट में चौंकाने वाला नाम संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का है। विभांशु ने 9 जनवरी को ASP अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। आरोप है कि संभल हिंसा के दौरान ASP अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने एक युवक को गोली मार दी थी।

विभांशु को सुल्तानपुर में सिविल जज सीनियर डिवीजन के पद पर भेजा गया है। चंदौसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह अब संभल के नए CJM हैं। आदित्य सिंह ने ही संभल के श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद दावे पर सर्वे के आदेश दिए थे। आदित्य कुमार सिंह को प्रमोशन दिया गया है।

क्या है पूरा मामला

ASP अनुज से जुड़े एक प्रकरण में निचली अदालत के जज ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आदेश सामने आते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल मच गई थी। आदेश के बाद से ही इसकी वैधता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कुछ पक्षों का कहना था कि आदेश जल्दबाजी में दिया गया, जबकि दूसरे पक्ष इसे कानून के तहत सही ठहराते रहे।

न्यायिक स्वतंत्रता पर बहस

इस घटनाक्रम ने न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर भी बहस छेड़ दी है। कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी जज को ऐसे समय पर हटाया जाना, जब उसने एक संवेदनशील मामले में आदेश दिया हो, गलत संदेश दे सकता है। वहीं, कुछ का कहना है कि न्यायिक प्रणाली में जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

ASP अनुज मामले पर आगे क्या

जज के हटने के बाद अब नजर इस बात पर टिकी है कि ASP अनुज से जुड़े मामले में आगे क्या रुख अपनाया जाता है। क्या FIR के आदेश की दोबारा समीक्षा होगी या मामला किसी अन्य अदालत में आगे बढ़ेगा—इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है।

प्रशासन और न्यायपालिका के लिए अहम संदेश

यह पूरा घटनाक्रम प्रशासन और न्यायपालिका दोनों के लिए एक अहम संदेश लेकर आया है। जहां एक ओर कानून के तहत निष्पक्ष कार्रवाई की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर यह भी जरूरी है कि न्यायिक फैसलों पर किसी तरह का दबाव महसूस न हो।