विपक्ष के सांसदों के हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही कल तक स्थगित — बजट सत्र में राजनीतिक गतिरोध बढ़ा
नई दिल्ली, 04 फ़रवरी 2026 । लोकसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान बुधवार को विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा भारी हंगामा और नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है। विपक्ष ने कई मुद्दों पर शोर और विरोध प्रदर्शन किया, जिससे संसद की कार्यवाही बाधित हो गई और नियत एजेंडा पर चर्चा नहीं हो सकी। संसद में गतिरोध का मुख्य कारण नेता प्रतिपक्ष केरल गांधी को बोलने के मौके को रोकना, पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े बयान पर विरोध और भारत-अमेरिका व्यापारी समझौते सहित कई राजनीतिक सवालों पर चर्चा की मांग है, जिस पर विपक्ष ने जोरदार प्रतिक्रिया दी।
विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे के चलते बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही 4 बार स्थगित हुई, जिसके बाद शाम 5 बजे सदन को गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। हंगामे के कारण पीएम नरेंद्र मोदी का आज शाम 5 बजे होने वाले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर संबोधन भी टल गया।
संसद में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के ऑफिस में विपक्ष और बीजेपी सांसदों के बीच भी बहस हुई है। ऑफिस का जो वीडियो सामने आया है इसमें विपक्ष की महिला सांसद केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेण रिजिजू से कुछ कहती नजर आ रही हैं।
वहीं, लोकसभा में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार और कांग्रेस पर लिखी किताबें और नोट्स दिखाए। उन्होंने कहा इन किताबों में गांधी परिवार और कांग्रेस परिवार की मक्कारी, गद्दारी, भ्रष्टाचार और अय्याशी का जिक्र है।
निशिकांत की कोट की गई किताबों में एडविना एंड नेहरू, रेमिनिसेंस ऑफ द नेहरू एज, द रेड साड़ी, एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर समेत दूसरी किताबें और नोट्स दिखाए। आज फिर चेयर की तरफ विपक्षी सांसदों ने पेपर उड़ाए। इस हंगामे से पहले आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था, जिसमें कांग्रेस और CPI(M) के सदस्य शामिल हैं, क्योंकि उन्होंने परिचालन विकृति और कागज़ उछालने जैसे अनुशासनहीन व्यवहार में हिस्सा लिया था। इन निलंबनों के विरोध में विपक्ष के प्रहार और शोर के चलते सदन को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। स्थगन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा में भाषण भी अगले दिन के लिए टाल दिया गया है, जिससे बजट सत्र की कार्यसूची पर प्रभाव पड़ा है। विपक्ष का कहना है कि यह “लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना” है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि संसदीय नियमों के उल्लंघन के कारण यह कार्रवाई आवश्यक थी।


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