मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: सनातन पर उदयनिधि का बयान ‘हेट स्पीच’, अभिव्यक्ति की आज़ादी की भी तय होती हैं सीमाएं
चेन्नई, 21 जनवरी 2026 । सनातन धर्म को लेकर तमिलनाडु सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन के बयान पर मद्रास हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए उसे ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में बताया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं होती, और किसी भी समुदाय, आस्था या विचारधारा के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयान संविधान के संरक्षण में नहीं आ सकते।
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि तमिलनाडु के डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन की सनातन के खिलाफ की गईं बातें हेट स्पीच के दायरे में आती हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी स्टालिन के तीन साल पुराने बयान को लेकर कीं।
दरअसल 2023 में उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया से करते हुए कहा था कि इसे मिटा देना चाहिए। इस बयान का काफी विरोध हुआ। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने स्टालिन के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह बयान देश के 80% सनातन धर्म मानने वालों के खिलाफ है। हालांकि स्टालिन की DMK पार्टी के एक नेता ने उल्टा मालवीय के खिलाफ केस कर दिया। आरोप लगाया कि मालवीय ने स्टालिन के बयान को तोड़-मरोड़ के पेश किया।
मालवीय ने एफआईआर के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई। तीन साल बाद मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने FIR को रद्द कर दिया है। जस्टिस एस. श्रीमथी ने कहा कि मालवीय ने मंत्री के बयान पर केवल प्रतिक्रिया दी थी। ऐसी प्रतिक्रिया पर केस चलाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
सार्वजनिक पद और जवाबदेही
कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि मंत्री या जनप्रतिनिधि के बयान को सामान्य व्यक्ति के बयान की तरह नहीं देखा जा सकता। उनके शब्द समाज को दिशा देते हैं और कई बार तनाव भी पैदा कर सकते हैं। ऐसे में जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी भाषा और मंशा दोनों पर ध्यान देना चाहिए।
सनातन पर बयान और कानूनी बहस
उदयनिधि स्टालिन के सनातन पर दिए गए बयान को लेकर पहले से ही देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है। मद्रास हाईकोर्ट की इस टिप्पणी ने उस बहस को कानूनी आधार भी दे दिया है। अदालत ने साफ किया कि किसी विचारधारा से असहमति जताना अलग बात है, लेकिन उसे अपमानजनक या नफरत भरे तरीके से पेश करना स्वीकार्य नहीं है।
अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम हेट स्पीच
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आलोचना और हेट स्पीच के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। आलोचना तर्क और विचार पर आधारित होती है, जबकि हेट स्पीच का उद्देश्य किसी समूह को नीचा दिखाना या समाज में विभाजन पैदा करना होता है। कानून ऐसे बयानों को रोकने के लिए है, न कि विचारों को दबाने के लिए।


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