पंजाब में नशा नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: भारी खेप के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश
लुधियाना , 28 मार्च 2026 । पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक संगठित नशा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद की है और इस पूरे ऑपरेशन में इस्तेमाल की जा रही चार गाड़ियों को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते नशे के कारोबार पर लगाम लगाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
सब-इंस्पेक्टर दलवीर सिंह अपनी पुलिस पार्टी के साथ जमालपुर चौक में गश्त पर तैनात थे। इसी दौरान एक खास मुखबिर ने सूचना दी कि ट्रक नंबर HR64A-5376, जिस पर 'गिल कैच' लिखा हुआ है और जिसका अगला हिस्सा (शो) सफेद रंग का है, उसमें भारी मात्रा में नशीला पदार्थ लदा हुआ है। सूचना मिली कि अज्ञात तस्कर इस ट्रक को जमालपुर इलाके में सप्लाई देने के बाद लाडोवाल क्षेत्र के एक सुनसान (बे-आबाद) इलाके में छिपाकर खड़े हैं। पुलिस ने बिना देरी किए बताए गए ठिकाने पर छापेमारी की। वहां मौजूद ट्रक की जब गहनता से तलाशी ली गई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। ट्रक के अंदर से कुल 3100 किलोग्राम (31 क्विंटल) चूरा पोस्त बरामद हुआ। इतना ही नहीं, मौके से तस्करी में इस्तेमाल होने वाली तीन अन्य गाड़ियां भी बरामद की गई हैं, जिनमें एक महिंद्रा बोलेरो (PB10CC-3767), एक इसुजु (ISUZU) गाड़ी (PB11CF-1759) और एक महिंद्रा स्कॉर्पियो (PB13BS-2020) शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और विभिन्न राज्यों के बीच नशीले पदार्थों की सप्लाई करता था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक बड़ा कंसाइनमेंट पंजाब में प्रवेश करने वाला है। इसी आधार पर विशेष टीम गठित की गई और रणनीतिक तरीके से नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहनों को रोका गया। तलाशी के दौरान वाहनों से भारी मात्रा में हेरोइन, सिंथेटिक ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित पदार्थ बरामद हुए।
इस ऑपरेशन के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे पूछताछ में कई अहम खुलासे होने की संभावना है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि तस्करी के इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं, जो सीमा पार से ड्रग्स की सप्लाई करते हैं और भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे फैलाते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब्त की गई चारों गाड़ियां अत्याधुनिक तरीके से मॉडिफाई की गई थीं, जिनमें ड्रग्स छिपाने के लिए विशेष कंपार्टमेंट बनाए गए थे। इससे साफ होता है कि तस्कर तकनीक का इस्तेमाल कर कानून से बचने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल, फॉरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।
राज्य सरकार और पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई गई है और ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि पुलिस अब सप्लाई चेन के हर स्तर को खंगाल रही है—चाहे वह स्थानीय डीलर हों या अंतरराष्ट्रीय सप्लायर।
यह कार्रवाई न केवल कानून-व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए भी एक सशक्त संदेश देती है कि सरकार और एजेंसियां इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं।


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