तमिलनाडु की SIR प्रक्रिया में बड़ी चूक – 84 लाख वोटर्स के फॉर्म जमा नहीं, चुनावी तैयारी पर गंभीर सवाल

तमिलनाडु की SIR प्रक्रिया में बड़ी चूक – 84 लाख वोटर्स के फॉर्म जमा नहीं, चुनावी तैयारी पर गंभीर सवाल

तमिलनाडु , 08 दिसंबर 2025 । तमिलनाडु में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्य में नए वोटर्स के नाम जोड़ने, पुराने नाम हटाने और जानकारी अपडेट करने के लिए जो अभियान चलाया गया था, उसमें 84 लाख से अधिक फॉर्म समय पर जमा ही नहीं किए गए। यह संख्या सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का संकेत नहीं है, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के फॉर्म 11 दिसंबर तक जमा होंगे। इसी बीच तमिलनाडु में अब तक मिले डेटा से पता चलता है कि मसौदा मतदाता सूची से 84 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम कट सकते हैं।

राज्य में अब तक 84.91 लाख एन्यूमरेशन फॉर्म अनकलेक्टेबल श्रेणी में हैं। यानी इन फॉर्म को अलग-अलग कारणों से इकट्ठा नहीं किया सकता है। इसमें अधूरी जानकारी होना, 2003 की लिस्ट में नाम न मिलना, वोटर की मौत या शिफ्ट हो जाना प्रमुख कारण हैं।

वहीं बंगाल में शुक्रवार तक अनकलेक्टेबल एन्यूमरेशन फॉर्म की संख्या 54.59 लाख थी। यानी इनके नाम वोटर्स लिस्ट से कटने की आशंका है। जबकि केरल में जिन वोटरों का पता नहीं चल रहा है, जो मर चुके हैं या स्थायी रूप से शिफ्ट हो गए हैं। उनकी संख्या बढ़कर 20 लाख से ज्यादा हो गई है।

दरअसल बिहार के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR 28 अक्टूबर से शुरू हुआ है। इस प्रोसेस में वोटर लिस्ट का अपडेशन होगा। नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और वोटर लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा।

SIR में गलत जानकारी देने पर पहला मामला दर्ज

यूपी पुलिस ने SIR फॉर्म में गलत जानकारी देने के आरोप में एक परिवार के खिलाफ केस दर्ज किया है। एफआईआर में नूरजहां और उनके दो बेटों आमिर और दानिश खान का नाम है, जो कई सालों से दुबई और कुवैत में रह रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, मां ने जानबूझकर SIR फॉर्म में गलत जानकारी भरी और बेटों के जाली दस्तखत किए, जो अब रामपुर में अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं रहते हैं। यह गड़बड़ी बीएलओ ने फॉर्म के डिजिटलीकरण के दौरान पकड़ी गई।

फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान यह पाया गया कि विदेश में रहने के बावजूद उनकी मां ने उनके फॉर्म भरे और अपने दस्तखत के साथ बीएलओ को जमा किए, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का उल्लंघन है।

तमिलनाडु की SIR प्रक्रिया में 84 लाख वोटर्स के फॉर्म जमा न होना केवल एक आंकड़ा नहीं है; यह गवर्नेंस की एक बड़ी चुनौती का संकेत है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और सुधारात्मक कदम तय करेंगे कि आगामी चुनावों में मतदाता सूची कितनी सटीक और भरोसेमंद रहेगी।