बहुजन समाज पार्टी में बड़ा फेरबदल: मायावती का संगठनात्मक दांव, नौशाद अली को 4 मंडलों की जिम्मेदारी

बहुजन समाज पार्टी में बड़ा फेरबदल: मायावती का संगठनात्मक दांव, नौशाद अली को 4 मंडलों की जिम्मेदारी

लखनऊ, 17 फ़रवरी 2026 । बहुजन समाज पार्टी (BSP) में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल करते हुए पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अहम जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। इसी क्रम में नौशाद अली को चार मंडलों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस फैसले को आगामी चुनावी रणनीति और जमीनी संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर खेमेबंदी शुरू हो गई है। रविवार को बीएसपी के पूर्व कद्दावर नेता और मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जैसे ही समाजवादी पार्टी का दामन थामा, बहुजन समाज पार्टी ने भी अगले ही दिन संगठन में बड़ा फेरबदल कर दिया। इस फेरबदल के तहत मायावती ने जहां अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ का पार्टी में कद बढ़ा दिया है, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दो मुस्लिम नेताओं को नई जिम्मेदारियों के साथ उतार दिया है।

बीएसपी की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पार्टी के बड़े नेता नौशाद अली को चार अहम मंडलों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। नौशाद अली अब मेरठ, आगरा, लखनऊ और कानपुर मंडल का कार्यभार संभालेंगे। इसके साथ ही पार्टी नेता जाफर मलिक को सहारनपुर, मुरादाबाद और अलीगढ़ मंडल की जिम्मेदारी दी गई है।

क्यों अहम है यह फैसला?

BSP लंबे समय से अपने कैडर आधारित ढांचे और बूथ स्तर की मजबूती के लिए जानी जाती है। ऐसे में मंडल स्तर पर प्रभारी बदलना या अतिरिक्त जिम्मेदारी देना संकेत देता है कि पार्टी संगठन को फिर से सक्रिय और पुनर्गठित करने की कोशिश में है।

  • मंडल स्तर पर संगठन की समीक्षा

  • बूथ और सेक्टर इकाइयों को सक्रिय करना

  • सामाजिक समीकरणों के आधार पर नई रणनीति

  • क्षेत्रीय नेतृत्व को स्पष्ट जवाबदेही

नौशाद अली को चार मंडलों की जिम्मेदारी सौंपना यह दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व उन पर भरोसा जता रहा है और उन्हें व्यापक क्षेत्र में संगठन विस्तार का दायित्व दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फेरबदल आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक मजबूती, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा और नए सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। मायावती समय-समय पर संगठन में बदलाव कर यह संदेश देती रही हैं कि प्रदर्शन और सक्रियता के आधार पर जिम्मेदारियां तय होंगी।