मराठी भाषा विवाद,मंत्री शेलार बोले-हिंदुओं को पीटना पहलगाम हमले जैसा

मराठी भाषा विवाद,मंत्री शेलार बोले-हिंदुओं को पीटना पहलगाम हमले जैसा

नई दिल्ली । 07 जुलाई, 25 । मुंबई में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मराठी बोलने को लेकर विवाद बड़ा सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। हिंदीभाषी लोगों के खिलाफ हिंसा के बीच महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार ने पहलगाम आतंकी हमले और मुंबई में ‘हिंदुओं’ की पिटाई को एकसमान बताया है।

शेलार ने उद्धव-राज ठाकरे का नाम न लेते हुए रविवार को कहा कि राज्य देख रहा है कि कैसे कुछ नेता ‘अन्य हिंदुओं की पिटाई का आनंद ले रहे हैं।’ उनकी यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई है, जिसमें MNS कार्यकर्ताओं ने मुंबई में मिठाई की दुकान के मालिक की मराठी न बोलने पर पिटाई कर दी थी।

इसके अलावा शनिवार को मनसे कार्यकर्ताओं ने शेयर बाजार निवेशक सुशील केडिया के वर्ली स्थित दफ्तर के कांच के दरवाजे तोड़ दिए थे। केडिया ने राज ठाकरे को चुनौती देते हुए कहा था कि वे मराठी नहीं बोलेंगे।

इधर, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे की हालिया टिप्पणियों की आलोचना की है और उन्हें ‘दादागिरी’ को बढ़ावा देने वाला बताया और MNS कार्यकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की

अठावले बोले- ऐसी घटनाओं से उद्योग बंद हो जाते हैं

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि लोगों को मराठी बोलने के लिए मजबूर करना गलत है। हिंसा में शामिल मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अठावले ने राज के रुख पर पूछा कि ऐसी घटनाओं के कारण उद्योग बंद हो जाते हैं तो क्या वे सभी को रोजगार देंगे।

5 जुलाई को मशहूर इन्वेस्टर सुशील केडिया के वर्ली स्थित ऑफिस में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और MNS चीफ राज ठाकरे के समर्थन में नारे लगाए थे।

पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है। ये हमला उद्धव और राज ठाकरे की संयुक्त रैली के कुछ घंटे पहले किया गया। ये हमला केडिया के 3 जुलाई की उनकी X पोस्ट के बाद हुआ।

मुंबई के मीरा रोड इलाके का एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो 30 जून का था। इसमें MNS कार्यकर्ताओं की गुजराती दुकानदार से मराठी न बोलने पर बहस हुई थी। कार्यकर्ता ने उससे कहा था कि तुमने मुझसे पूछा कि मराठी क्यों बोलनी चाहिए? जब तुम्हें परेशानी थी, तब तुम MNS ऑफिस आए थे।'

दुकानदार ने जवाब में कहा था कि उसे नहीं पता था कि मराठी बोलना अब जरूरी हो गया है। इस पर एक कार्यकर्ता गाली देते हुए दुकानदार को धमकाता है कि उसे इस इलाके में कारोबार नहीं करने दिया जाएगा।