कांग्रेस की रैली में ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ का नारा, सियासी बयानबाज़ी पर मचा घमासान

कांग्रेस की रैली में ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ का नारा, सियासी बयानबाज़ी पर मचा घमासान

नई दिल्ली, 15 दिसंबर 2025 । कांग्रेस की एक रैली के दौरान लगाए गए विवादित नारे ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। रैली में कथित तौर पर “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” जैसे नारे लगाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है। इस घटना ने चुनावी राजनीति में भाषा और मर्यादा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' के नारों की वजह से कांग्रेस की 'वोट चोर गद्दी छोड़' रैली विवादों में आ गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैली में जाते समय 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' के नारे लगाए। यह रैली दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को हुई।

बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, एक बार फिर कांग्रेस का चरित्र सामने आ गया है। वे मोदी जी की मौत की कामना कर रहे हैं। उनकी मुस्लिम लीग और माओवादी सोच सबके सामने आ गई। मोदी की कब्र खोदने की बात करने वाली पार्टी खुद दफन हो जाएगी। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का भी वही हाल होगा जो औरंगजेब के समय मुगलों का हुआ था।

भाजपा सांसद बोले- राहुल औरंगजेब की तरह परिवार की छठी पीढ़ी

राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस का भविष्य शायद वैसा ही होने वाला है जैसा 'द लास्ट मुगल' किताब में मुगल साम्राज्य के बारे में लिखा गया है। मुगल साम्राज्य में छह लोगों ने शासन किया - बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब। छठी पीढ़ी के शासन के बाद मुगल साम्राज्य खत्म हो गया।

इसी तरह कांग्रेस पर भी नेहरू परिवार के छह लोगों ने शासन किया है- मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी। राहुल गांधी छठे हैं जो अभी सत्ता का आनंद ले रहे हैं। इनके बाद कांग्रेस का भी मुगलों जैसा हश्र होगा।

भाजपा ने इस नारे को प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और असंवैधानिक करार देते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह की भाषा न सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि राजनीतिक हिंसा और नफरत को भी बढ़ावा देती है। भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

वहीं कांग्रेस की ओर से सफाई देते हुए कहा गया है कि पार्टी इस तरह के शब्दों या नारों का समर्थन नहीं करती। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि रैलियों में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और कई बार व्यक्तिगत स्तर पर नारे लग जाते हैं, जिन्हें पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को जानबूझकर तूल देकर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के नारे दोनों पक्षों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। जहां एक ओर ऐसे नारे विपक्ष की छवि को आक्रामक और गैर-जिम्मेदार दिखा सकते हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इन्हें भावनात्मक मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर सकता है। इस पूरी बहस के केंद्र में यह सवाल भी है कि क्या चुनावी राजनीति में भाषा की एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए।

कुल मिलाकर, कांग्रेस की रैली में लगे इस नारे ने राजनीतिक विमर्श की गुणवत्ता और मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राजनीतिक दल इस तरह की घटनाओं से क्या सबक लेते हैं और चुनावी अभियान को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।