विपक्ष भी उतारेगा उपराष्ट्रपति उम्मीदवार, 18 अगस्त को होगी बैठक

विपक्ष भी उतारेगा उपराष्ट्रपति उम्मीदवार, 18 अगस्त को होगी बैठक

नई दिल्ली, 13 अगस्त, 2025. आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्षी दलों ने भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतारने का फैसला किया है। इस संबंध में 18 अगस्त को विपक्षी गठबंधन की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें संयुक्त उम्मीदवार के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, राजद, जदयू, शिवसेना (यूबीटी) सहित कई प्रमुख दल शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य एजेंडा एक ऐसे चेहरे का चयन करना होगा, जो विपक्षी एकता का प्रतीक बन सके और सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार को चुनौती दे सके।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि उपराष्ट्रपति का चुनाव सिर्फ एक संवैधानिक पद के लिए मतदान नहीं है, बल्कि यह मौजूदा राजनीतिक माहौल में लोकतंत्र और विपक्ष की मजबूती का संदेश देने का अवसर भी है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि उम्मीदवार का चयन सर्वसम्मति से किया जाएगा ताकि विपक्षी एकजुटता का स्पष्ट संकेत मिले।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भले ही संख्याबल के मामले में विपक्ष पिछड़ रहा है, लेकिन एक मजबूत और चर्चित उम्मीदवार खड़ा करने से चुनाव में राजनीतिक माहौल गरमा सकता है।

अगले कुछ दिनों में संभावित नामों को लेकर अटकलें तेज होने की संभावना है, और 18 अगस्त की बैठक के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी कि विपक्ष किसे अपना उपराष्ट्रपति प्रत्याशी बनाएगा।

भाजपा की तरफ से थावरचंद गहलोत सबसे प्रबल दावेदार इस बीच, भाजपा इस पद के लिए अपनी विचारधारा के प्रति समर्पित कार्यकर्ता को उम्मीदवार बना सकती है। फिलहाल जिन नामों पर पार्टी में विचार चल रहा है, उनमें कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। अन्य नाम सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर का भी है।

संसद में NDA के पास बहुमत

  1. लोकसभा में कुल 542 सदस्यों में से NDA के पास 293 और I.N.D.I. गठबंधन के पास 234 सदस्य हैं।
  2. राज्यसभा में 240 सदस्यों की प्रभावी संख्या में से NDA को करीब 130 और I.N.D.I. गठबंधन को 79 सांसदों का समर्थन है।
  3. कुल मिलाकर NDA के पास 423 और INDIA ब्लॉक के पास 313 सांसदों का समर्थन है। शेष सदस्य किसी भी खेमे से जुड़े नहीं हैं।

थावरचंद गहलोत अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। 77 वर्षीय गहलोत राज्यसभा में सदन के नेता रह चुके हैं साथ ही केंद्रीय मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। भाजपा में वे सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं। जातीय समीकरण (दलित) में भी वे फिट बैठते हैं। वह मध्य प्रदेश से हैं। उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है।