PM बोले– डीपफेक रोकने के लिए AI कंटेंट पर अनिवार्य लेबल लगे: डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा संकेत
नई दिल्ली, 19 फ़रवरी 2026 । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने डीपफेक तकनीक के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए कंटेंट पर स्पष्ट और अनिवार्य लेबल लगाए जाने चाहिए। उनका मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों के जरिए गलत सूचना फैलाना लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और सामाजिक सद्भाव के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का गुरुवार को चौथा दिन है। आज के सत्र में PM नरेंद्र मोदी ने कहा- डिजिटल कंटेंट पर ऑथेंटिसिटी लेबल होना चाहिए ताकि असली और एआई-जनरेटेड कंटेंट में फर्क पता चल सके।
वहीं रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि हम साबित करेंगे कि AI नौकरियां नहीं छीनता, बल्कि हाई-स्किल काम के नए मौके देता है। उन्होंने ये भी कहा कि भारत में 'इंटेलिजेंस युग' लाने के लिए 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेंगे।
इससे पहले गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने कहा- AI को सबके लिए उपयोगी बनाने के लिए हमें साहसिक कदम उठाने होंगे, क्योंकि यह अरबों लोगों की जिंदगियों को बेहतर बना सकता है।
समिट को आज कई ग्लोबल लीडर्स संबोधित कर रहे हैं। यह समिट 20 फरवरी तक चलेगी। इसमें आज 110 से ज्यादा देश, 20 से ज्यादा देशों के प्रमुख, 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन और 500+ दुनिया के AI लीडर शामिल हुए हैं। समिट में करीब 100 CEOs और फाउंडर्स, 150 अकादमिक और रिसर्चर, 400 CTOs, VPs, 100+ सरकारी प्रतिनिधि मौजूद हैं।
डीपफेक तकनीक AI और मशीन लर्निंग के जरिए किसी व्यक्ति की आवाज या चेहरा बदलकर भ्रामक सामग्री तैयार करती है। हाल के वर्षों में कई सार्वजनिक हस्तियों के नाम पर फर्जी वीडियो वायरल हुए हैं, जिससे भ्रम और दुष्प्रचार फैला। विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी मौसम में इसका दुरुपयोग और बढ़ सकता है।
AI कंटेंट पर लेबल क्यों जरूरी?
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पारदर्शिता – यदि किसी वीडियो या तस्वीर पर स्पष्ट रूप से लिखा हो कि यह AI-जनरेटेड है, तो दर्शक भ्रमित नहीं होंगे।
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फर्जी खबरों पर रोक – लेबलिंग से गलत सूचना के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।
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जवाबदेही तय करना – प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएटर दोनों की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
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चुनावी सुरक्षा – राजनीतिक दुष्प्रचार और छवि धूमिल करने की कोशिशों पर अंकुश लगेगा।
AI-जनरेटेड कंटेंट पर लेबल लगाने की पहल डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम हो सकती है। इससे न केवल फर्जी खबरों पर लगाम लगेगी, बल्कि नागरिकों का ऑनलाइन सामग्री पर भरोसा भी मजबूत होगा। तकनीक के इस दौर में जिम्मेदारी और जागरूकता दोनों ही जरूरी हैं।


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