PM मोदी की अपील का असर: योगी, रेखा गुप्ता और मोहन यादव समेत कई मुख्यमंत्रियों ने घटाया अपना काफिला

PM मोदी की अपील का असर: योगी, रेखा गुप्ता और मोहन यादव समेत कई मुख्यमंत्रियों ने घटाया अपना काफिला

नई दिल्ली, 13 मई 2026 । प्रधानमंत्री Narendra Modi की सादगी और प्रशासनिक सुधारों को लेकर की गई अपील का असर अब राज्यों में भी साफ दिखाई देने लगा है। देश के कई मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता अपने लंबे-चौड़े वीआईपी काफिलों को छोटा करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath, दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav समेत कई नेताओं ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल के बीच संतुलन बनाते हुए अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने का फैसला लिया है।

प्रमुख पहल और मुख्यमंत्रियाँ द्वारा उठाए गए कदम

  • उत्तर प्रदेश (सीएम योगी आदित्यनाथ): मुख्यमंत्री योगी ने अपने और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या 50% तक कम करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) इस्तेमाल करने की भी सलाह दी है।

  • दिल्ली (सीएम रेखा गुप्ता): दिल्ली की मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वे और उनके कैबिनेट सहयोगी केवल न्यूनतम आवश्यक वाहनों का उपयोग करेंगे। उन्होंने कारपूलिंग को प्राथमिकता देने की बात कही है।

  • मध्य प्रदेश (सीएम मोहन यादव): मुख्यमंत्री ने सुरक्षा की दृष्टि से अपने काफिले में वाहनों की संख्या न्यूनतम रखने का निर्णय लिया है और मंत्रियों से भी यात्रा के दौरान वाहन कम करने की अपील की है।

  • राजस्थान (सीएम भजन लाल शर्मा): उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा से जुड़े मूवमेंट के दौरान अनावश्यक वाहनों के इस्तेमाल से बचें।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के दिनों में सरकारी खर्चों में कटौती, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और जनता को होने वाली असुविधा कम करने पर जोर दिया था। इसी के बाद कई राज्यों ने अपने वीआईपी मूवमेंट की समीक्षा शुरू की। पहले जहां नेताओं के काफिलों में दर्जनों गाड़ियां शामिल रहती थीं, वहीं अब सीमित वाहनों के साथ यात्रा करने का संदेश दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बड़े काफिलों के कारण अक्सर आम लोगों को ट्रैफिक जाम, सड़क बंद होने और लंबा इंतजार जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब छोटे काफिलों से न केवल जनता को राहत मिलेगी बल्कि ईंधन और सरकारी संसाधनों की भी बचत होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बदलाव “नए भारत” की राजनीति का संकेत माना जा रहा है, जहां नेताओं की छवि सादगी, जवाबदेही और जनता से जुड़ाव के आधार पर मजबूत की जा रही है। खासतौर पर युवा मतदाताओं के बीच ऐसे संदेशों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी मुख्यमंत्री या वीवीआईपी की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जरूरत के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था बरकरार रहेगी, लेकिन अनावश्यक वाहनों और दिखावे को कम करने पर जोर रहेगा।

इस पहल को आम जनता के बीच भी सराहना मिल रही है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे “VIP कल्चर खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम” बताया है। आने वाले समय में अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्री भी इसी मॉडल को अपनाते नजर आ सकते हैं।