पाकिस्तान ने राम मंदिर में पीएम मोदी के ध्वजारोहण का विरोध किया: अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक तनाव
नई दिल्ली, 26 नवम्बर 2025 । अयोध्या में राम मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए ध्वजारोहण को लेकर पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इसे “उत्तेजक कदम” बताते हुए कहा कि भारत की यह कार्रवाई “क्षेत्रीय सौहार्द और धार्मिक संवेदनशीलता को प्रभावित करती है।”
भारत की ओर से अब तक पाकिस्तान के इस बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन भारतीय कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को धार्मिक राजनीतिक कोण देकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान ने अयोध्या के राम मंदिर में पीएम मोदी के ध्वजारोहण पर विरोध जताया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि यह भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते दबाव और मुस्लिम विरासत को मिटाने की कोशिश का हिस्सा है।
पाकिस्तान ने कहा कि जिस जगह पहले बाबरी मस्जिद थी, वहां अब राम मंदिर बनाया गया है। पाकिस्तान ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद कई सदियों पुरानी धार्मिक जगह थी। 6 दिसंबर 1992 को इसे भीड़ ने गिरा दिया था।
PM मोदी ने मंगलवार को मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। उन्होंने सुबह 11.50 बजे अभिजीत मुहूर्त में 2 किलो की केसरिया ध्वजा 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहराई।
पाकिस्तान ने UN से दखल की मांग की
पाकिस्तान ने कहा कि भारत की अदालतों ने बाबरी मस्जिद गिराने के आरोपियों को बरी कर दिया और उसी जमीन पर मंदिर निर्माण की इजाजत दे दी। यह अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का बड़ा उदाहरण है।
पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों पर दबाव बढ़ रहा है। भारत की कई ऐतिहासिक मस्जिदें खतरे में हैं। मुसलमानों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तौर से हाशिये पर धकेला जा रहा है।
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह भारत में बढ़ते इस्लामोफोबिया, नफरत और मुसलमानों पर हमलों पर ध्यान दे। उसने UN और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से कहा कि वे भारत में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएं।
राम मंदिर में ध्वजारोहण भारत के लिए सांस्कृतिक-धार्मिक भावनाओं का विषय है, जबकि पाकिस्तान इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहता है। दोनों देशों के बीच संवाद लंबे समय से ठप है, और ऐसे बयान संबंधों में और दूरी पैदा करते हैं।


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