पाकिस्तानी PM का बयान: ‘कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा’
इस्लामाबाद, 06 फ़रवरी 2026 । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि कश्मीर “पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा।” उनके इस बयान के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं और सीमा पार मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बयानबाजी जारी है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को PoK में कश्मीर को लेकर एक बार फिर विवादित बयान दिया है। मुजफ्फराबाद में विधानसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा।’
शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ मजबूती से खड़ा है और जम्मू-कश्मीर विवाद का हल कश्मीर के लोगों की इच्छा के मुताबिक होना चाहिए। शहबाज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों को लागू करने से ही हो सकता है।
उन्होंने कहा, ‘मैं पाकिस्तानी लोगों और पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से कश्मीर के अपने भाइयों के साथ एकजुटता दिखाने आया हूं।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने इस क्षेत्र को पाकिस्तान की लाइफ लाइन बताया था।
पाकिस्तानी PM ने अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दे को ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भों से जोड़ते हुए कहा कि उनकी सरकार इस विषय को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाती रहेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान कश्मीर के लोगों के “राजनीतिक अधिकारों” का समर्थन करता रहेगा। हालांकि, उन्होंने किसी नई कूटनीतिक पहल या ठोस कदम का उल्लेख नहीं किया।
भारत का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इस पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। नई दिल्ली पहले भी ऐसे बयानों को आंतरिक मामलों में दखल करार देती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी अक्सर घरेलू राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और क्षेत्रीय दबावों से भी जुड़ी होती है।
कश्मीर मुद्दा दशकों से भारत-पाकिस्तान संबंधों का केंद्रीय विषय रहा है। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया था। तब से सीमा पर संघर्षविराम समझौते और सीमित संवाद के बावजूद राजनीतिक बयान समय-समय पर माहौल को गरमा देते हैं।
फिलहाल, इस बयान पर भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे वक्तव्यों से द्विपक्षीय वार्ता की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह एक संवेदनशील विषय बना रहेगा।


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