पाकिस्तान में ‘धुरंधर’ फिल्म के खिलाफ याचिका दायर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस

पाकिस्तान में ‘धुरंधर’ फिल्म के खिलाफ याचिका दायर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस

इस्लामाबाद, 13 दिसंबर 2025 । पाकिस्तान में भारतीय फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस फिल्म के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म की विषयवस्तु और प्रस्तुति पाकिस्तान की छवि, राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील मुद्दों को प्रभावित कर सकती है। याचिका दाखिल होने के बाद न सिर्फ फिल्म जगत, बल्कि राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी इस मामले पर चर्चा तेज हो गई है।

पाकिस्तान में कराची की एक अदालत में भारतीय फिल्म ‘धुरंधर’ के खिलाफ शुक्रवार को एक याचिका दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की तस्वीरों, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के झंडे और पार्टी रैलियों के फुटेज का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया है।

इसके साथ ही फिल्म पर पीपीपी को आतंकवाद का समर्थन करने वाली पार्टी के रूप में दिखाने का भी आरोप लगाया गया है। यह याचिका पीपीपी के कार्यकर्ता मोहम्मद आमिर ने कराची के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट (साउथ) में दाखिल की है।

याचिका में मांग की गई है कि फिल्म के निर्देशक, निर्माता, कलाकार और फिल्म के प्रचार व निर्माण से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ FRI दर्ज की जाए।

याचिका में फिल्म के निर्देशक आदित्य धर, निर्माता लोकेश धर और ज्योति किशोर देशपांडे के नाम शामिल हैं। इसके अलावा अभिनेता रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, आर माधवन, सारा अर्जुन और राकेश बेनी को भी नामजद किया गया है।

याचिका में कहा- पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचाया

याचिकाकर्ता के अनुसार, फिल्म के आधिकारिक ट्रेलर में बेनजीर भुट्टो की तस्वीरों और PPP से जुड़े दृश्य बिना किसी कानूनी अनुमति के दिखाए गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म में PPP को आतंकियों के प्रति सहानुभूति रखने वाली पार्टी के रूप में पेश किया गया है।

साथ ही कराची के लियारी इलाके को 'आतंकियों का युद्ध क्षेत्र' बताया गया है, जो याचिकाकर्ता के मुताबिक मानहानिकारक, भ्रामक और पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि फिल्म में दिखाए गए कुछ कथानक और संवाद आपत्तिजनक हैं और इससे जनता में गलत संदेश जा सकता है। उनका दावा है कि ऐसी फिल्मों को प्रदर्शित करने से पहले सख्त जांच और सेंसर प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि फिल्म की स्क्रीनिंग या वितरण पर रोक लगाई जाए, जब तक कि इसकी सामग्री की विस्तृत समीक्षा न हो जाए।

दूसरी ओर, फिल्म से जुड़े समर्थकों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर समूहों का कहना है कि कला और सिनेमा को राजनीतिक विवादों से अलग रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि फिल्मों को काल्पनिक और रचनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी देश या समुदाय के खिलाफ प्रचार के तौर पर। इस मुद्दे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रीय संवेदनशीलता और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। ‘धुरंधर’ के खिलाफ दायर याचिका उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है, जहां सिनेमा राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का केंद्र बन जाता है। अब सबकी निगाहें अदालत के रुख पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह मामला केवल कानूनी दायरे में रहेगा या फिर व्यापक राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस का रूप लेगा।