प्रधानमंत्री का सख्त संदेश: भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा
नई दिल्ली, । 09 सितम्बर 2025 । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि आतंकवाद केवल किसी देश या क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए खतरा है।
आतंकवाद पर भारत की नीति
भारत लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है। चाहे जम्मू-कश्मीर हो, मुंबई हमले हों या देश के अन्य हिस्से – आतंकवादी गतिविधियों ने देश को गहरे घाव दिए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह बयान भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूत करता है।
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आतंकी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई
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सीमापार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख
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वैश्विक सहयोग की मांग
प्रधानमंत्री का जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि:
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आतंकवाद किसी धर्म, संस्कृति या विचारधारा से जुड़ा नहीं है, यह केवल हिंसा और विनाश का मार्ग है।
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अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि एकजुट होकर इसका मुकाबला करना चाहिए।
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भारत हर उस मंच पर अपनी आवाज उठाता रहेगा, जहां आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
वैश्विक सहयोग की आवश्यकता
आतंकवाद की जड़ें अक्सर सीमा पार से मिलती हैं। प्रधानमंत्री ने इस पर चिंता जताई और कहा कि जब तक सभी देश एकजुट होकर कठोर कदम नहीं उठाएंगे, तब तक इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
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आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद रोकना जरूरी है।
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तकनीकी सहयोग से आतंकियों की डिजिटल गतिविधियों पर नज़र रखनी होगी।
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सीमा सुरक्षा और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करना होगा।
भारत के प्रयास
भारत पहले ही आतंकवाद से लड़ने के लिए कई ठोस कदम उठा चुका है।
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NIA और UAPA कानून के जरिए आतंकी गतिविधियों पर शिकंजा कसा गया है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UN और G20 जैसे मंचों पर भारत ने आतंकवाद विरोधी एजेंडा उठाया है।
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भारत ने कई देशों के साथ मिलकर Counter-Terrorism Cooperation समझौते किए हैं।
संदेश का महत्व
प्रधानमंत्री का यह बयान केवल भारत की सुरक्षा नीति नहीं, बल्कि वैश्विक शांति का भी संकेत है। आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए भारत एक मजबूत आवाज बन चुका है। इससे यह साफ है कि आने वाले समय में भारत आतंकवाद से निपटने के लिए और आक्रामक रुख अपना सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह सख्त संदेश भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। आतंकवाद के खिलाफ यह आवाज केवल भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए है। यदि वैश्विक समुदाय एकजुट होकर कदम उठाए तो आतंकवाद को जड़ से मिटाया जा सकता है।


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