मणिपुर की नई डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन के खिलाफ विरोध — राजनीतिक संदेश या जमीनी असंतोष?
नई दिल्ली/इंफाल , 05 फ़रवरी 2026 । मणिपुर में नई डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन की नियुक्ति के बाद कुछ इलाकों में विरोध की खबरें सामने आई हैं। यह विरोध कई स्तरों पर देखा जा रहा है—स्थानीय राजनीतिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, और समुदाय आधारित अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ। राज्य की संवेदनशील सामाजिक संरचना के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि उन्हें क्षेत्रीय संतुलन और प्रतिनिधित्व को लेकर आपत्ति है। उनका तर्क है कि सत्ता में भागीदारी का वितरण राज्य के विभिन्न इलाकों और समुदायों के बीच संतुलित होना चाहिए। वहीं समर्थक पक्ष इसे सरकार का प्रशासनिक निर्णय बताते हुए कहता है कि अनुभव और संगठनात्मक भूमिका के आधार पर यह नियुक्ति की गई है।
मणिपुर पहले से ही सामाजिक और सुरक्षा चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे माहौल में किसी भी बड़े राजनीतिक निर्णय का जमीनी प्रतिक्रिया से जुड़ जाना स्वाभाविक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध केवल व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य की वृहद सत्ता संरचना पर चल रही बहस का हिस्सा है।
मणिपुर में आज से विधानसभा का नया सत्र शुरू हो रहा है। यह सत्र नए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद बुलाया गया है। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने गुरुवार शाम 4 बजे से सत्र बुलाया है।
इधर, दिल्ली में बुधवार शाम को कुकी-जो समूह से जुड़े लोगों ने मणिपुर भवन के बाहर प्रदर्शन किया। मणिपुर में जॉइंट फोरम ऑफ सेवन (JF7) ने शुक्रवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कुकी बहुल इलाकों में बंद का आह्वान किया है।
ये विरोध प्रदर्शन कुकी समुदाय से आने वाली उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन का किया जा रहा है। कुकी-जो परिषद ने कहा है कि यदि समुदाय का कोई विधायक सामूहिक फैसले के खिलाफ सरकार में शामिल होता है, तो उसके फैसले की जिम्मेदारी संगठन की नहीं होगी।
यह भी देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर कई तरह की राय सामने आ रही हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता शांति बनाए रखना और राजनीतिक असहमति को लोकतांत्रिक ढंग से संबोधित करना है।


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