दिल्ली में किराया न चुका पाने की त्रासदी—मां ने दो बेटों के साथ की आत्महत्या, सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल

दिल्ली में किराया न चुका पाने की त्रासदी—मां ने दो बेटों के साथ की आत्महत्या, सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल

नई दिल्ली, 13 दिसंबर 2025 । दिल्ली में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां आर्थिक तंगी और आवासीय संकट से जूझ रही एक मां ने अपने दो बेटों के साथ आत्महत्या कर ली। बताया गया कि परिवार लंबे समय से किराया नहीं चुका पा रहा था, जिसके चलते अदालत ने मकान खाली करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद परिवार पर मानसिक दबाव और असहायता की स्थिति और गहराती चली गई, जो अंततः इस दुखद फैसले तक पहुंच गई।

दिल्ली के कालकाजी इलाके में शुक्रवार दोपहर एक घर में एक ही परिवार के 3 लोगों ने आर्थिक तंगी की वजह से आत्महत्या कर ली। स्थानीय कोर्ट ने उन्हें किराया का घर शुक्रवार तक खाली करने के लिए कहा था।

पुलिस के मुताबिक परिवार पिछले कई महीनों से 25 हजार रुपए मासिक किराया नहीं चुका पा रहा था। इसी वजह से मकान मालिक ने उन्हें बेदखल करने के लिए अदालत का रुख किया था। अदालत ने परिवार को हर हाल में शुक्रवार तक घर खाली करने को कहा था।

पुलिस ने बताया कि सामूहिक आत्महत्या की वजह यह हो सकती है। मृतकों में अनुराधा कपूर (52) और उनके दो बेटे आशीष कपूर (32) और वैभव कपूर (27) शामिल है। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें लिखा है कि परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है, इस कारण सामूहिक तौर पर यह कदम उठाया।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, महिला अकेले ही परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थी और सीमित आय के कारण किराया, रोजमर्रा के खर्च और बच्चों की जरूरतें पूरी करना कठिन होता जा रहा था। अदालत का आदेश मिलने के बाद उनके पास न तो वैकल्पिक आवास था और न ही तत्काल कोई सहायता। इस घटना ने शहरी गरीबों, किराएदारों और एकल अभिभावकों के सामने खड़े संकटों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

इस मामले के सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने शहरी आवास नीति, किराएदारों की सुरक्षा और आपातकालीन सामाजिक सहायता तंत्र को मजबूत करने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर रहने के बजाय ऐसे मामलों में सामाजिक कल्याण, परामर्श और त्वरित राहत की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि परिवारों को अंतिम कदम उठाने से रोका जा सके।

घटना ने यह भी सवाल खड़े किए हैं कि आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों तक सरकारी योजनाएं और सहायता समय पर क्यों नहीं पहुंच पातीं। मानसिक स्वास्थ्य समर्थन, आवासीय सुरक्षा और संकट-हस्तक्षेप तंत्र की कमी शहरी भारत की एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। यह त्रासदी नीतिगत सुधारों और संवेदनशील प्रशासनिक हस्तक्षेप की तत्काल जरूरत की ओर संकेत करती है।