रुपया डॉलर के मुकाबले करीब ₹92 के स्तर पर पहुंचा — घरेलू और वैश्विक कारणों से कमजोरिश की चाल तेज़

रुपया डॉलर के मुकाबले करीब ₹92 के स्तर पर पहुंचा — घरेलू और वैश्विक कारणों से कमजोरिश की चाल तेज़

नई दिल्ली, 24 जनवरी 2026 । भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले लगभग ₹92 के पास पहुंच गया है, जो इतिहास में एक नया कमजोर स्तर माना जा रहा है। बाजार खुलते ही रुपया कमजोर हुआ और इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में डॉलर के मुकाबले ₹92 तक छूने के बाद यह ₹91.88 पर बंद हुआ (प्रोविड़निंग स्तर), जिससे यह पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर के पास आ गया।

भारतीय रुपया को 1 डॉलर के मुकाबले 92 रुपए के करीब पहुंच गया है। PTI के मुताबिक आज दिन के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 91.99 पर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनाव की वजह से रुपया में यह गिरावट देखी जा रही है।

साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। अब महज 20 दिनों के भीतर यह 91 के स्तर को भी पार कर गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल टेंशन और दुनिया भर के शेयर बाजारों में अस्थिरता के चलते निवेशक गोल्ड और डॉलर में निवेश बढ़ा रहे हैं।

इस गिरावट के कई मुख्य कारण हैं:

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा शेयरों की बिकवाली से बढ़ा डॉलर की मांग।

  • घरेलू इक्विटी मार्केट की कमजोरी और ‘रिस्क-ऑफ’ माहौल से रुपया दबाव में रहा।

  • कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में वृद्धि से भी डॉलर की ताकत बढ़ी, जिससे रुपया ओर दब गया।

विश्लेषकों की निगाह में यह स्तर सिर्फ एक सांकेतिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि संकेत दे रहा है कि वित्तीय बाजारों में मुद्रा विनिमय दबाव और पूंजी निकासी जैसी चुनौतियाँ फिलहाल जारी हैं। कुछ बातों पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि इस कमजोर रुख से आयात लागत, महंगाई और व्यापार घाटा पर असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें भी ऊँची हैं।

हालाँकि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) और नीतिगत कदमों के चलते रूपये के कमजोर होने की गति और सीमा पर नियंत्रण की कोशिश होती रहती है, वर्तमान स्तर यह दर्शाता है कि डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने आरबीआई की रणनीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को चुनौती दी है।