रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, पहली बार 92.33 पर पहुंचा

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, पहली बार 92.33 पर पहुंचा

नई दिल्ली, 09 मार्च 2026 । भारतीय मुद्रा Indian Rupee ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नया रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया पहली बार 92.33 प्रति डॉलर तक गिर गया, जिससे आर्थिक बाजारों और निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।

भारतीय रुपया आज 9 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 46 पैसे गिरकर 92.33 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात के बीच ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और डॉलर के मजबूत होने की वजह से रुपए में यह बड़ी गिरावट आई है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक युद्ध शांत नहीं होता, रुपए पर दबाव बना रह सकता है। इस साल रुपए में अब तक 2% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इससे चलते यह 2026 में दुनिया के इमर्जिंग मार्केट्स की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी में से एक बन गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार रुपये में यह गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारणों की वजह से आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में United States Dollar की मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पूंजी निकालना इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इन कारकों के चलते रुपये पर दबाव बढ़ता गया और वह नए निचले स्तर पर पहुंच गया।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि जब डॉलर मजबूत होता है, तो उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है। भारत जैसे देशों में आयात अधिक होने के कारण डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपये की कीमत और कमजोर हो जाती है। खासकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता होने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ता है।

रुपये की कमजोरी का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य विदेशी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। वहीं विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा भी महंगी हो सकती है। हालांकि निर्यात करने वाले उद्योगों को इससे कुछ फायदा मिल सकता है, क्योंकि कमजोर रुपये के कारण भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ते हो जाते हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक परिस्थितियों में सुधार होता है और विदेशी निवेश फिर से भारतीय बाजार की ओर आकर्षित होता है, तो रुपये में स्थिरता आ सकती है। फिलहाल वित्तीय बाजार इस उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार व केंद्रीय बैंक स्थिति पर करीबी निगरानी रखे हुए हैं।