कुछ राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ सकती है — प्रशासनिक तैयारियों, तकनीकी चुनौतियों और राज्यों की मांग पर बड़ा फैसला संभव

कुछ राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ सकती है — प्रशासनिक तैयारियों, तकनीकी चुनौतियों और राज्यों की मांग पर बड़ा फैसला संभव

नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025 ।  कई राज्यों ने केंद्र को संकेत दिया है कि SIR (State Inspection Report / State Implementation Report) की मौजूदा समयसीमा पूरी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो रहा है। प्रशासनिक व्यस्तता, फील्ड स्तर पर डेटा संग्रह में देरी और तकनीकी प्लेटफॉर्म पर बढ़े लोड के कारण कई राज्यों ने डेडलाइन बढ़ाने की आधिकारिक मांग भी की है। इसे देखते हुए सरकार अगले चरण में कुछ राज्यों को डेडलाइन एक्सटेंशन देने पर विचार कर सकती है।

केरल को छोड़कर देश के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के फॉर्म जमा करने की आज आखिरी तारीख है। चुनाव आयोग के अधिकारी गुरुवार को फॉर्म डिजिटाइजेशन और जमा करने की प्रोग्रेस का रिव्यू करेंगे।

इस मीटिंग के दौरान उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लिए SIR की डेडलाइन बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। NDTV ने चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल भी उन राज्यों में शामिल है जहां डेडलाइन बढ़ाई जा सकती है। इससे पहले आयोग ने केरल के लिए आखिरी तारीख 11 दिसंबर से बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दी थी।

जानकारी के अनुसार कई जिलों में सर्वे, वेरिफिकेशन और दस्तावेज़ अपलोडिंग की गति अपेक्षाकृत धीमी है। कई अधिकारी चुनावी तैयारियों, वर्षांत गतिविधियों या योजनाओं की ग्राउंड मॉनिटरिंग में व्यस्त हैं, जिससे SIR की प्रगति प्रभावित हुई है। टेक्निकल टीम ने भी माना है कि पोर्टल पर कई बार ट्रैफिक अधिक होने से प्रक्रियाएँ धीमी हो जाती हैं।

अगर सरकार एक्सटेंशन को मंजूरी देती है, तो राज्य स्तर पर कई लाभ मिलेंगे—

  • जमीनी डेटा की गुणवत्ता सुधरेगी, क्योंकि अधिकारी जल्दबाजी में रिपोर्ट नहीं भरेंगे।

  • बड़ी योजनाओं का मूल्यांकन अधिक सटीक तरीके से हो सकेगा।

  • फील्ड टीमों को रियल-टाइम वेरिफिकेशन पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

  • पोर्टल पर तकनीकी ओवरलोड कम होगा, जिससे दूसरे राज्यों की रिपोर्टिंग सुचारू चलेगी।

सूत्रों के अनुसार कुछ प्रमुख राज्यों ने पहले ही इस पर औपचारिक अनुरोध भेज दिया है और अगर समीक्षा बैठक में सहमति बनी, तो चुनिंदा राज्यों को सीमित अवधि के लिए डेडलाइन बढ़ाने की अनुमति दी जा सकती है।