संजय मिश्रा का जीवन मंत्र—‘लोग क्या कहेंगे छोड़ो, खुद की सुनो’: आत्मविश्वास, संघर्ष और स्व-निर्णय की ताकत पर बेबाक संदेश

संजय मिश्रा का जीवन मंत्र—‘लोग क्या कहेंगे छोड़ो, खुद की सुनो’: आत्मविश्वास, संघर्ष और स्व-निर्णय की ताकत पर बेबाक संदेश

नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025 । फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा ने अपने हालिया बयान में एक बेहद गहरा और प्रेरक संदेश दिया—“लोग क्या कहेंगे छोड़ो, खुद की सुनो।” यह विचार सिर्फ एक सलाह नहीं, बल्कि उनकी निजी और पेशेवर यात्रा का सार है। बॉलीवुड में संघर्षों, उतार-चढ़ाव और आत्म-संदेह के दौर से गुजरने वाले संजय मिश्रा जानते हैं कि बाहरी राय अक्सर व्यक्ति के सपनों और कामयाबी के बीच दीवार बन जाती है।

एक्ट्रेस महिमा चौधरी और संजय मिश्रा की फिल्म ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह एक रोमांटिक कॉमेडी है। जिसमें एक बेटा अपने विधुर पिता दुर्लभ प्रसाद के लिए दूसरी दुल्हन ढूंढता है। यह फिल्म परिवार के दबाव, प्यार, हंसी और पारिवारिक रिश्तों पर केंद्रित है।

हाल ही में दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान संजय मिश्रा ने फिल्म के पोस्टर पर लोगों की प्रतिक्रियाओं, महिमा चौधरी से शादी की अफवाहों की सच्चाई, और सेकंड चांस यानी जिंदगी में नए अवसरों को अपनाने की सोच पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने उम्र बढ़ने के बावजूद जीवन में उम्मीद और जिंदादिली बनाए रखने का संदेश दिया, साथ ही "लोग क्या कहेंगे" की चिंता छोड़ खुद की सुनने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि समाज की अपेक्षाओं में फंसकर लोग अपनी वास्तविक क्षमताओं को पीछे छोड़ देते हैं, जबकि सफलता उसी की होती है जो अपने मन की आवाज सुनने की हिम्मत रखता है। संजय मिश्रा की फिल्मों का सफर भी इसी सोच को साबित करता है—जहां उन्होंने पारंपरिक हीरोइज़्म के बजाय अपनी शैली और अभिनय की गहराई से दर्शकों का दिल जीता।

उनका यह संदेश युवाओं, कलाकारों और उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो निर्णय लेते समय दूसरों की आलोचना या प्रतिक्रिया से डरते हैं। मिश्रा का मानना है कि मौलिकता, साहस और स्व-निर्णय ही जीवन को दिशा देते हैं, न कि “लोग क्या कहेंगे” जैसा दबाव।
उनकी यह स्टेटमेंट मानसिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है और यह याद दिलाती है कि दुनिया की राय बदलती रहती है, पर खुद की सुनने का साहस ही व्यक्ति को आगे ले जाता है।