यूपी में सनसनीखेज मामला: बेटी की जिद पर बच्चे की खरीद, जेल भेजे गए पिता की हिरासत में मौत
इटावा, 25 फ़रवरी 2026 । उत्तर प्रदेश में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बेटी की कथित जिद पर “भाई” लाने के लिए एक व्यक्ति ने नवजात बच्चे को अवैध रूप से खरीद लिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अब हिरासत के दौरान उसकी मौत हो जाने से मामला और संवेदनशील हो गया है।
‘मम्मी-पापा मेरे लिए एक भाई ला दो…’ बेटी रोज अपने पिता से यही जिद करती थी. उसकी जिद के आगे पिता ने जो किया, वो हैरान करने वाला था. उसने दलालों से एक मासूम बच्चा खरीद लिया. यह बच्चा ट्रेन से चुराया गया था. हालांकि, पुलिस ने पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और बच्चे को बरामद कर लिया. अब खबर है कि पिता की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. ये घटना उत्तर प्रदेश के इटावा की है.
मृतक युवक का नाम अशोक कुमार (42 साल) है, जोकि इटावा जेल में बंद था. अशोक गौतमबुद्ध नगर जिले के दादरी के तुलसी गांव निवासी था. उसे जेल में सीने में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हुई. जेल चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया. वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर पैसों के बदले एक शिशु को खरीदा था। यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने मानव तस्करी और अवैध गोद लेने से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया। बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के संरक्षण में भेजा गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। जेल प्रशासन के अनुसार, उसकी तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि परिजनों ने मौत को लेकर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों की पुष्टि की जाएगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध गोद लेने और शिशु खरीद-फरोख्त जैसे मामले सामाजिक और कानूनी दृष्टि से गंभीर अपराध हैं। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई और जागरूकता दोनों आवश्यक हैं।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि जेल प्रशासन और सामाजिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती है। फिलहाल, जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।


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