शाह बोले— ममता घुसपैठ नहीं रोक सकतीं: सीमा सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सियासी आरोपों के बीच तीखी बयानबाज़ी
कोलकाता, 30 दिसंबर 2025 । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि वह राज्य में घुसपैठ को रोकने में विफल रही हैं। शाह के इस बयान ने बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है और एक बार फिर सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे सियासी बहस के केंद्र में आ गए हैं। उनका आरोप है कि राज्य सरकार की कथित नरमी और प्रशासनिक कमजोरी के कारण घुसपैठ की समस्या गंभीर बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा है कि शकुनि का चेला दुशासन बंगाल में जानकारी जुटाने आया है। जैसे ही चुनाव आते हैं, दुशासन और दुर्योधन दिखाई देने लगते हैं। आज बीजेपी कह रही है कि ममता बनर्जी ने जमीन नहीं दी, तो फिर पेट्रापोल और अंडाल में जमीन किसने दी?
बांकुरा में आयोजित कार्यक्रम में ममता ने कहा- बीजेपी कहती है कि घुसपैठिए सिर्फ बंगाल से ही आते हैं। अगर ऐसा है तो क्या पहलगाम में हमला आपने कराया था? दिल्ली में जो घटना हुई, उसके पीछे कौन था? बीजेपी SIR के नाम पर लोगों को परेशान कर रही है।
ममता का ये बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर आया है। पश्चिम बंगाल दौरे के दूसरे दिन आज शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता सरकार घुसपैठ को रोक नहीं पा रही है। अगर राज्य में भाजपा सरकार बनी तो यहां परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। बंगाल में सभी योजनाएं डेड एंड पर पहुंच गई हैं।
दरअसल, शाह बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर यहां पहुंचे हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 तक है। चुनाव मार्च-अप्रैल 2026 में होना लगभग तय है। यहां कुल 294 सीटें हैं, TMC की सरकार है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से इस तरह के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया जाता रहा है। राज्य सरकार का तर्क है कि सीमा सुरक्षा केंद्र के अधीन आती है और बीएसएफ की भूमिका इसमें अहम है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारियों से ध्यान हटाने के लिए राज्य सरकार पर आरोप मढ़ रही है। इससे पहले भी केंद्र और राज्य के बीच बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र और भूमिका को लेकर टकराव देखने को मिला है।
इस बयानबाज़ी के बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घुसपैठ का मुद्दा आगामी चुनावों और सियासी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है। एक ओर जहां भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जोड़कर उठा रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों से जोड़कर देखती है। यह टकराव केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नीति, प्रशासन और केंद्र-राज्य संबंधों पर भी सवाल खड़े होते हैं।
कुल मिलाकर, अमित शाह का यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई तीव्रता लेकर आया है। घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय, पारदर्शिता और ठोस कार्रवाई की जरूरत पर बहस तेज हो गई है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सियासी बयानबाज़ी से आगे बढ़कर इस समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक कदम कितनी प्रभावी ढंग से उठाए जाते हैं।


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