सिद्धारमैया का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, बोले—‘मनरेगा हटाकर सरकार ने गांधी को दूसरी बार मारा’
बेंगलुरु, 03 जनवरी 2026 । कर्नाटक के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी योजना को कमजोर या खत्म करने की कोशिश कर सरकार ने महात्मा गांधी को दूसरी बार मारा है। सिद्धारमैया का यह बयान सामने आते ही राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई है और सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
कर्नाटक के CM सिद्धरमैया ने शनिवार को मनरेगा स्कीम की जगह लाए गए विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट (VB-G RAM G) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को पहली बार गोडसे ने मारा था। लेकिन मनरेगा को खत्म करके केंद्र सरकार ने दूसरी बार महात्मा गांधी को मारा है।
बेंगलुरु के एक कार्यक्रम में सिद्धरमैया ने कहा कि मनरेगा का मकसद गरीब और छोटे किसानों को फायदा पहुंचाना था, लेकिन मोदी सरकार ने राज्यों से सलाह किए बिना यह फैसला लिया, जो तानाशाही रवैया दिखाता है।
सिद्धारमैया ने BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर महिलाओं, दलितों का विरोध करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा- मनरेगा को खत्म करके वे कॉर्पोरेट हितों की मदद कर रहे हैं और ग्रामीण आजीविका को नष्ट कर रहे हैं। VB Ram G बिल खत्म कर मनरेगा स्कीम को फिर से शुरू करने की जरूरत है।
वहीं कांग्रेस ने मनरेगा को फिर से लाने के लिए 10 जनवरी से 25 फरवरी तक ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाने की घोषणा की है। इस आंदोलन के तहत देशभर में जिला, पंचायत, वार्ड और राज्य स्तर पर कार्यक्रम होंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के चलते ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी बढ़ रही है और गरीब वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। सिद्धारमैया ने कहा कि मनरेगा के जरिए करोड़ों लोगों को कठिन समय में सहारा मिला, खासकर महामारी और आर्थिक संकट के दौर में। ऐसे में इस योजना को नजरअंदाज करना या समाप्त करना अमानवीय और जनविरोधी कदम है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि गांधीजी ने हमेशा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के बारे में सोचने की बात कही थी, लेकिन मौजूदा सरकार की नीतियां इसके ठीक उलट हैं। उनका आरोप है कि सरकार कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि ग्रामीण मजदूर और किसान हाशिये पर धकेले जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसी नीतियां जारी रहीं, तो सामाजिक असमानता और गहरी हो जाएगी।
सिद्धारमैया के इस बयान पर सत्तारूढ़ दल की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। भाजपा पहले भी यह कहती रही है कि मनरेगा में सुधार और पारदर्शिता जरूरी है, जबकि कांग्रेस इसे गरीबों की जीवनरेखा बताती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल मनरेगा तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले ग्रामीण और गरीब मतदाताओं को साधने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
कुल मिलाकर, सिद्धारमैया का यह बयान मनरेगा, गांधी विचारधारा और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे रहा है, जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।


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