सिंगल मदर को पूर्ण अभिभावक का अधिकार: बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला
मुंबई, 20 फ़रवरी 2026 । बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सिंगल मदर (एकल मां) भी अपने बच्चे की पूर्ण और वैध अभिभावक (Full Guardian) हो सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, स्कूल एडमिशन या अन्य कानूनी दस्तावेजों में पिता का नाम अनिवार्य रूप से दर्ज होना जरूरी नहीं है, यदि मां ही बच्चे की एकमात्र अभिभावक है।
बॉम्बे हाइकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने बच्ची के पिता का नाम स्कूल के रिकॉर्ड्स से हटाने की रेप पीड़ित मां की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि बच्चे का पालन-पोषण अकेले करने वाली मां को पूर्ण अभिभावक मानना दया नहीं, संविधान के प्रति निष्ठा है।
जस्टिस विभा कांकणवाड़ी और जस्टिस हितेन वेणुगावकर की पीठ ने कहा कि बच्चे की पहचान ऐसे पिता से क्यों जोड़नी, जिसका जीवन में कोई संबंध नहीं? संविधान का अनुच्छेद 21 सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है और पहचान भी उसी गरिमा का हिस्सा है।
दरअसल, इस मामले में मां दुष्कर्म पीड़िता है। डीएनए टेस्ट से आरोपी बॉयोलॉजिकल पिता सिद्ध हुआ था। लेकिन उसने बच्चे से अलग रहना चुना। इसके बावजूद जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल रिकॉर्ड में पिता का नाम दर्ज था। स्कूल ने इसमें संशोधन से इनकार किया गया तो मां-बेटी हाइकोर्ट पहुंचीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल जाति प्रमाणन प्राधिकरण नहीं, पर स्पेशल केस में रिकॉर्ड को ठीक किया जा सकता है।
फैसले की प्रमुख बातें
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एकल मां को बच्चे की प्राकृतिक और कानूनी संरक्षक माना जा सकता है।
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सरकारी दस्तावेजों में पिता का नाम न होने के आधार पर आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता।
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बच्चे के सर्वोत्तम हित (Best Interest of the Child) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि बदलते सामाजिक ढांचे में पारिवारिक स्वरूप भी बदल रहे हैं, इसलिए कानून की व्याख्या भी उसी अनुरूप की जानी चाहिए।


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