शेयर बाजार में हल्की गिरावट, सेंसेक्स 54 अंक फिसलकर 85,213 पर बंद
नई दिल्ली, 15 दिसंबर 2025 । भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सत्र के अंत में हल्की कमजोरी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 54 अंकों की गिरावट के साथ 85,213 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव करता रहा, जहां शुरुआती बढ़त टिक नहीं पाई और अंततः मुनाफावसूली के दबाव में सूचकांक लाल निशान में बंद हुआ।
शेयर बाजार में आज यानी 15 दिसंबर को फ्लैट कारोबार रहा। सेंसेक्स 54 अंक गिरकर 85,213 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 20 अंक की गिरावट रही। ये 26,027 पर बंद हुआ। आज सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 16 में गिरावट और 14 में बढ़त रही।
निफ्टी के 50 शेयरों में से 27 में गिरावट और 22 में बढ़त रही। वहीं 1 शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ। आज ऑटो, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में गिरावट रही। वहीं IT और FMCG शेयर्स में बढ़त रही।
ग्लोबल मार्केट में गिरावट
- एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई इंडेक्स 1.31% नीचे 50,168 पर और कोरिया का कोस्पी 1.84% गिरकर 4,090 पर बंद हुआ।
- हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 1.34% गिरकर 25,628 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.55% नीचे 3,867 पर बंद हुआ।
- 12 दिसंबर को अमेरिका का डाउ जोन्स 0.51% गिरकर 48,458 पर और S&P 500 1.07% गिरकर 6,827 बंद हुआ। वहीं, नैस्डेक कंपोजिट 1.69% गिरा।
कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के चुनिंदा शेयरों में दबाव देखने को मिला, जिससे सेंसेक्स पर असर पड़ा। निवेशकों में सतर्कता का माहौल रहा और बड़े स्तर पर नई खरीदारी से बचते नजर आए। वहीं, कुछ चुनिंदा हैवीवेट शेयरों में हल्की गिरावट ने बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई।
वैश्विक संकेतों का भी घरेलू बाजार पर असर दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसके अलावा, आने वाले आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर अनिश्चितता के कारण भी बाजार में सतर्कता बनी रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर बाजार में कंसोलिडेशन का दौर चल रहा है। मजबूत घरेलू आर्थिक बुनियाद के बावजूद निवेशक फिलहाल मुनाफावसूली और सेक्टर रोटेशन की रणनीति अपना रहे हैं। ऐसे में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जबकि लंबी अवधि के निवेशक चुनिंदा शेयरों में अवसर तलाशते रहेंगे।
कुल मिलाकर, सेंसेक्स की 54 अंकों की गिरावट किसी बड़े नकारात्मक संकेत के बजाय सामान्य बाजार उतार-चढ़ाव का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत, कॉरपोरेट नतीजे और आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।


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