दिल्ली में पत्थरबाजी मामले ने तूल पकड़ा, सपा सांसद से पूछताछ करेगी पुलिस
नई दिल्ली, 08 जनवरी 2026 । दिल्ली में हुई पत्थरबाजी की घटना को लेकर जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। पुलिस ने इस मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सांसद से पूछताछ करने का फैसला लिया है। इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और मामले को लेकर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
दिल्ली में 6 जनवरी की रात फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई पत्थरबाजी को लेकर सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से पूछताछ की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारियों के बार-बार कहने के बावजूद नदवी घटनास्थल से नहीं गए और आसपास मौजूद रहे।
पुलिस ने पत्थरबाजी की घटना पर CCTV कैमरा फुटेज के आधार पर 30 लोगों की पहचान की है। पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपियों को हिरासत में लेने के लिए छापेमारी कर रही हैं।
दरअसल पूरा मामला फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने से जुड़ा है। पुलिस की टीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अतिक्रमण हटाने गई थी। इस बीच कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई कि मस्जिद गिराई जाएगी। जिससे हिंसा भड़की। पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके गए, 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए।
घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था, जिसे देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और चश्मदीदों के बयान के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पत्थरबाजी संगठित थी या अचानक भड़की हिंसा का नतीजा।
इस मामले पर सपा की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है। वहीं, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि कानून सभी के लिए बराबर है और जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी जनप्रतिनिधि से पूछताछ अपने आप में असामान्य नहीं है, बशर्ते इसके पीछे ठोस आधार और साक्ष्य हों। इस केस का असर सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिल्ली की राजनीति और आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और पूछताछ के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। लेकिन इतना तय है कि दिल्ली पत्थरबाजी मामला अब कानून से ज्यादा राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है।


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