दिल्ली में सुनीता विलियम्स का भावुक बयान: बोलीं– भारत आना मेरे लिए घर वापसी जैसा अनुभव

दिल्ली में सुनीता विलियम्स का भावुक बयान: बोलीं– भारत आना मेरे लिए घर वापसी जैसा अनुभव

नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026 । प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स जब दिल्ली पहुंचीं, तो उनका स्वागत सिर्फ एक वैश्विक वैज्ञानिक के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की बेटी के रूप में किया गया। इस दौरान उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि भारत आना उनके लिए हमेशा घर वापसी जैसा अनुभव होता है। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के साथ-साथ देशभर में उनके प्रशंसकों को भावुक कर दिया।

भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने मंगलवार को कहा, इस समय दुनिया में अंतरिक्ष को लेकर एक तरह की होड़ (स्पेस रेस) चल रही है। कई देश चांद और अंतरिक्ष में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। लक्ष्य सिर्फ पहले पहुंचना नहीं है, बल्कि यह है कि इंसान सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक रहने लायक तरीके से चांद पर जाए।

सुनीता ने यह बात दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर' सेमिनार में कहीं। उन्होंने यह भी कहा कि यह काम सबके फायदे, सहयोग और पारदर्शिता के साथ, लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक देश का दबदबा न हो और पूरी मानवता को इसका लाभ मिले। सभी देश सहयोग के साथ आगे बढ़ें, बिल्कुल अंटार्कटिका मॉडल की तर्ज पर।

युवाओं को दिया खास संदेश

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सुनीता विलियम्स ने भारतीय युवाओं को विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो सिर्फ जिज्ञासा, मेहनत और सही दिशा की। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरिक्ष विज्ञान में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।

भारत की प्रगति से प्रभावित

सुनीता विलियम्स ने भारत में हो रहे तकनीकी और वैज्ञानिक विकास की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हर बार भारत आकर उन्हें देश में हो रहे बदलाव और प्रगति देखकर गर्व महसूस होता है। खास तौर पर अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों ने उन्हें बेहद प्रभावित किया है।

लोगों की गर्मजोशी ने जीता दिल

उन्होंने दिल्ली के लोगों की मेहमाननवाजी और अपनापन की तारीफ करते हुए कहा कि यही बातें भारत को खास बनाती हैं। सुनीता विलियम्स के मुताबिक, यहां के लोग सिर्फ सवाल नहीं पूछते, बल्कि दिल से जुड़ते हैं, और यही एहसास उन्हें बार-बार भारत खींच लाता है।