फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पर लगी शिक्षिका बर्खास्त—शिक्षा विभाग की सख्ती से मचा हड़कंप

फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पर लगी शिक्षिका बर्खास्त—शिक्षा विभाग की सख्ती से मचा हड़कंप

देहरादून,  10 अप्रैल 2026 । शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सहायक अध्यापिका की सेवा समाप्त कर दी गई है। जांच में सामने आया कि संबंधित शिक्षिका ने नियुक्ति के समय फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, जिसके आधार पर उन्हें नौकरी मिली थी। मामला सामने आते ही विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।

 विभागीय जांच में अनुसूचित जाति का प्रस्तुत प्रमाणपत्र कूटरचित पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। मामला डोईवाला क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जौलीग्रांट प्रथम का है, जहां सहायक अध्यापिका सीमा देवी तैनात थीं। आरोप था कि उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग का फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर आरक्षित श्रेणी का लाभ लेते हुए नियुक्ति पाई।

जांच के दौरान यह पाया गया कि शैक्षणिक योग्यता और प्रमाणपत्रों में गंभीर अनियमितताएं थीं। दस्तावेजों का सत्यापन होने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी नौकरी में पारदर्शिता और योग्यता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग ने अन्य नियुक्तियों की भी जांच तेज कर दी है, ताकि इसी तरह के मामलों को समय रहते पकड़ा जा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अन्य कर्मचारी के दस्तावेजों में भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन करता है।

इस घटना के बाद विभाग ने भर्ती प्रक्रिया को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। डिजिटल वेरिफिकेशन, दस्तावेजों की क्रॉस-चेकिंग और सख्त निगरानी जैसे उपायों को लागू किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी नौकरी में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।