आतंकी डॉ. उमर सुसाइड बॉम्बर तैयार कर रहा था
नई दिल्ली, 19 नवम्बर 2025 । सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी षड्यंत्र का खुलासा करते हुए बताया है कि कुख्यात आतंकी डॉ. उमर गुप्त रूप से सुसाइड बॉम्बर्स तैयार करने में लगा हुआ था। खुफिया सूत्रों के अनुसार, वह एक संगठित मॉड्यूल चला रहा था, जिसमें युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर उन्हें आत्मघाती हमलों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था। यह मॉड्यूल सीमा पार से मिलने वाली फंडिंग और तकनीकी सहायता के जरिए सक्रिय था।
लाल किले के सामने विस्फोटक से भरी कार उड़ाने वाला आतंकी डॉ. उमर नबी अपने जैसे कई और सुसाइडल बॉम्बर तैयार करने की साजिश रच रहा था। इसके लिए वह लगातार वीडियो बनाकर युवाओं को भेजता था, ताकि उनका ब्रेनवॉश किया जा सके। जांच एजेंसियों ने इसका खुलासा किया है।
NIA सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन में डॉ. उमर के 12 वीडियो समेत 70 से ज्यादा वीडियो मिले हैं। ऐसे ही वीडियो 11 लोगों को भेजे गए थे। इनमें से 7 युवा कश्मीरी मूल के बताए जा रहे हैं और सभी का अल-फलाह यूनिवर्सिटी से लिंक मिला है। बाकी 4 युवा उत्तर प्रदेश, केरल और कर्नाटक के रहने वाले हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि आमिर रशीद अली, जिसने उमर नबी को I-20 कार दिलवाई थी, खुद सुसाइड बॉम्बर बनने को तैयार नहीं था। इसके बाद उमर ने उसे भी ऐसे ही ब्रेनवॉश करने वाले वीडियो भेजे थे। एजेंसियों को शक है कि उमर नबी एक पूरी फिदायीन टीम तैयार कर रहा था और उसका टारगेट कई राज्यों के युवा थे।
दिल्ली ब्लास्ट से पहले पुलवामा गया था आतंकी उमर
दिल्ली कार ब्लास्ट में खुद को उड़ाने वाला आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद हमले से करीब 2 हफ्ते पहले पुलवामा के कोइल गांव में अपने घर गया था। उमर ने अपने दो मोबाइल फोन में से एक अपने भाई जहूर इलाही को दिया और कहा कि अगर मेरे कोई खबर आए तो फोन पानी में फेंक देना।
इसी फोन से वह वीडियो मिला है, जिसमें उमर आत्मघाती हमले को 'शहादत का ऑपरेशन' बता रहा है। जहूर ने सुरक्षा एजेंसियों को पूछताछ में फोन के बारे में जानकारी दी है। जहूर ने बताया कि उमर ने उसे 26 से 29 अक्टूबर के बीच फोन दिया था। 9 नवंबर को अल-फलाह यूनिवर्सिटी से उमर के साथियों की गिरफ्तारी की खबर सुनते ही उसने घबराकर फोन घर के पास एक तालाब में फेंक दिया था।
एजेंसियों का मानना है कि डॉ. उमर की गिरफ्तारी या खुलासा किसी बड़े आतंकी हमले को रोकने में बेहद अहम साबित हो सकता है। सुरक्षा बल अब उन सभी संदिग्धों की तलाश में हैं, जिनके साथ उसका संपर्क था या जिन्हें वह प्रशिक्षण दे चुका था।
यह खुलासा बताता है कि आतंकी संगठन लगातार अपनी रणनीतियों को बदल रहे हैं और अकेले-भेड़िए मॉडल से लेकर प्रशिक्षित सुसाइड स्क्वॉड तक विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे समय में निगरानी, खुफिया जानकारी और सामुदायिक सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो गया है।


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