‘परीक्षा पे चर्चा’ में प्रधानमंत्री का खास अंदाज़, बच्चों को पहनाए असम के पारंपरिक गमछे
नई दिल्ली, 06 फ़रवरी 2026 । ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ संवाद के बीच एक खास सांस्कृतिक संदेश भी दिया। कार्यक्रम में शामिल कुछ बच्चों को उन्होंने असम का पारंपरिक गमछा पहनाकर सम्मानित किया। यह कदम न केवल विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाने वाला था, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर प्रदर्शित करने का प्रतीक भी बना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 'परीक्षा पे चर्चा' के 9वें एडिशन में देशभर से आए बच्चों से मुलाकात की। दिल्ली स्थित पीएम आवास पर मोदी ने पहले बच्चों को असम के गमछे पहनाए और फिर उनके सवालों के जवाब दिए।
पहले एपिसोड में मोदी ने बच्चों को विदेशी चीजें छोड़कर स्वदेशी चीजें अपनाने की सलाह दी। साथ ही, बच्चों से कहा कि वो 25 साल में विकसित भारत बनाने को अपना सपना बनाएं।
असम का गमछा, जिसे ‘गमोसा’ भी कहा जाता है, राज्य की पहचान और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर लाल और सफेद रंग के संयोजन में तैयार यह पारंपरिक वस्त्र सम्मान, आदर और आत्मीयता दर्शाने के लिए भेंट किया जाता है। इसे त्योहारों, सांस्कृतिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर पहनाया जाता है। प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों को गमछा पहनाना इसी परंपरा का विस्तार माना जा रहा है।
पीएम मोदी की चर्चा की 5 बड़ी बातें-
- विकसित भारत को अपना सपना बनाएं पीएम बोले- जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे तब आप लोग 39-40 साल के होंगे। आपको अभी से विकसित भारत को अपना सपना बनाना चाहिए। भगत सिंह आजादी का सपना दिल में रखकर फांसी पर झूल गए। जो आजादी से 25 साल पहले, 30 साल पहले बलिदान किए गए, उसी से आजादी मिली। अपना सपना बनाएं कि विकसित भारत के लिए मुझे क्या करना है।
- खुद पर भरोसे से भगाएं कोई भी डर स्टूडेंट ने सवाल किया कि प्रेजेंटेशन देते समय मैं घबरा जाता हूं। इस डर को कैसे भगाऊं?पीएम ने कहा- कभी देखा है कि फुटपाथ पर कोई गरीब महिला भी जब टीवी पर किसी घटना के बारे में बताती है तो कितने आत्मविश्वास से बात करती है। क्या उसने इंटरव्यू की कोई प्रैक्टिस की है? नहीं। उसका आत्मविश्वास आता है सच्चाई है। उसे पता है कि उसने जो देखा वही कहना है। आप भी अपने किए हुए पर भरोसा रखें तो प्रेजेंटेशन का डर भाग जाएगा।
- देश की अमर कहानियों पर गेम बनाओ गोवा के श्रीजीत गाडगिल ने सवाल किया, मेरा गेमिंग में बहुत इंटरेस्ट है। मगर पेरेंट्स नहीं समझते। मैं क्या करूं। पीएम ने जवाब दिया- भारत देश कहानियों से भरा हुआ है। आप खुद के गेम बनाओ। पंचतंत्र की कहानियों पर गेम बनाओ। अभिमन्यु की कहानी पर गेम बनाओ और अपनी वेबसाइट बनाकर उसपर लॉन्च करो। धीरे-धीरे देखोगे कि कितने लोग तुम्हारे गेम्स खेल रहे हैं।
- मार्क्स-मार्क्स की बीमारी से बचो एक स्टूडेंट के सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा- पता नहीं ये मार्क्स- मार्क्स की बीमारी कैसे फैल गई है। आप लोगों को पिछले साल के टॉप 1 से 10 तक के नाम याद हैं क्या? ये उप्लब्धि तो कुछ देर के लिए होती है। हमें ये देखना चाहिए कि पढ़ाई से हमारे जीवन पर क्या असर हुआ है। न कि ये कि हमारे मार्क्स कितने आए हैं।
- स्किल या मार्क्स में से एक के पीछे न भागो एक स्टूडेंट ने पीएम से सवाल किया कि स्किल जरूरी है या मार्क्स? पीएम मोदी ने कहा कि इस सवाल का कोई सही जवाब नहीं है। अगर एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे ही। जीवन में स्किल की जरूरत तो होगी ही और स्टूडेंट होने के नाते मार्क्स लाने भी जरूरी हैं। सही जवाब है कि दोनों के बीच संतुलन चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से परीक्षा के तनाव को कम करने, आत्मविश्वास बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह सीखने और खुद को बेहतर बनाने का एक अवसर है। बच्चों के साथ संवाद में उन्होंने समय प्रबंधन, फोकस और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से बचने जैसे विषयों पर भी चर्चा की।
‘परीक्षा पे चर्चा’ हर वर्ष आयोजित होने वाला संवाद कार्यक्रम है, जिसमें देशभर के छात्र, शिक्षक और अभिभावक भाग लेते हैं। इसका उद्देश्य परीक्षा को उत्सव की तरह लेने और दबावमुक्त माहौल में तैयारी करने की प्रेरणा देना है। इस बार असम के गमछे के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया।
प्रधानमंत्री का यह gesture छात्रों के लिए यादगार पल बन गया और कार्यक्रम को एक भावनात्मक तथा सांस्कृतिक आयाम भी मिला।


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