महबूबा मुफ्ती की बहन के अपहरण का आरोपी गिरफ्तार — 36 साल बाद हुआ केस में बड़ी प्रगति

महबूबा मुफ्ती की बहन के अपहरण का आरोपी गिरफ्तार — 36 साल बाद हुआ केस में बड़ी प्रगति

श्रीनगर, 02 दिसंबर 2025 । हाल ही में Central Bureau of Investigation (CBI) ने 1989 में हुए उस सनसनीखेज अपहरण-कांड में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसमें उस समय गृह मंत्री रहे मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी और महबूबा मुफ्ती की बहन रुबैया सईद की जबरन बरग़रस्ती हुई थी।

तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का 1989 में घर से आधा किलोमीटर दूर अपहरण कर लिया गया। रुबैया, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन हैं।

अपहरण के पांच दिन बाद केंद्र की तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने पांच आतंकवादियों को रिहा किया, तब जाकर आतंकियों ने रुबैया को छोड़ा था।

इस घटना के 35 साल बाद सोमवार को किडनैपिंग केस में भगोड़ा घोषित शफात अहमद शांगलू को CBI ने श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया। शांगलू पर JKLF की साजिश का हिस्सा होने का आरोप है।

शांगलू ने रणबीर पीनल कोड और TADA एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत यासीन मलिक और दूसरों के साथ मिलकर किडनैपिंग को अंजाम दिया था।

शांगलू जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के चीफ यासीन मलिक का करीबी माना जाता है। उस पर 10 लाख रुपए का इनाम भी था।

एजेंसी ने एक बयान में कहा कि शांगलू को जम्मू के TADA कोर्ट में पेश किया जाएगा। शांगलू JKLF में एक ऑफिसर था। वह ऑर्गनाइजेशन का फाइनेंस संभाल रहा था।

सरकारी गवाह बनी मुफ्ती सईद की बेटी

तमिलनाडु में रह रहीं सईद को CBI ने सरकारी गवाह के तौर पर लिस्ट किया है। जांच एजेंसी ने 1990 में यह केस अपने हाथ में लिया था। सईद ने मलिक के अलावा चार और आरोपियों की पहचान इस जुर्म में शामिल होने के तौर पर की गई थी।

एक स्पेशल TADA कोर्ट ने सईद के किडनैपिंग केस में मलिक और नौ अन्य के खिलाफ पहले ही चार्ज फ्रेम कर दिए हैं। वहीं, JKLF चीफ यासीन मलिक, टेरर फाइनेंसिंग केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है।

क्यों है यह गिरफ्तारी अहम
  • यह गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि समय चाहे कितना भी बीत जाए, लंबे समय से चल रही जाँच और न्याय प्रक्रिया जारी रह सकती है।

  • इससे शिकार परिवारों और पीड़ितों को न्याय मिलने का विश्वास बढ़ता है, जो कि लंबे समय तक अपहृत या अन्याय का सामना करते रहे।

  • साथ ही, आतंकवाद-संबंधित और अपहरण जैसे मामलों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी को भी अहम मोड़ मिलता है।