यमुना सफाई अभियान की कमान शाह ने संभाली 

" आलोक गौड़ "

" कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर 
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर। "


नई दिल्ली। मृतप्राय: यमुना नदी को पुनर्जीवित करने के लिए बनाई गई 9000 करोड़ रुपए की परियोजना की कमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संभाल ली है। इसके स्पष्ट संकेत अमित शाह के दिल्ली में शुक्रवार को उच्चस्तरीय एक बैठक की अध्यक्षता करने व दिल्ली सरकार को इस बारे में निर्देश देने से मिल गए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन व दिल्ली के मुख्य सचिव धर्मेंद्र के अलावा कई वरिष्ट अधिकारी मौजूद थे।
इस बैठक में मैली यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए बनाई गई योजना की समीक्षा करने के बाद अमित शाह ने दिल्ली सरकार को कई निर्देश भी दिए।
उन्होंने दिल्ली के दो प्रमुख व बड़े नाले नजफगढ़ और शाहदरा के बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा सुधारने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को आलस्य छोड़ कर जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हो जाना चाहिए।
अमित शाह ने यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने के साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एस टी पी) की क्षमता साल 2028 तक बढ़ा कर 1500 एमजीडी करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए पुराने सभी तालाब, पोखर व अन्य स्रोतों को पुनर्जीवित करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली के प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मुहैया कराने के लिए हर संभव उपाय करने के निर्देश भी दिए।
अमित शाह की इस बैठक का असर यह हुआ कि दिल्ली के जल मंत्री परवेश साहिब सिंह ने आनन फानन में दिल्ली की सीवेज व्यवस्था के लिए 15 दिन के भीतर ही मास्टर प्लान और इसके बारे में रिपोर्ट मिलने पर उसे लागू करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता में इजाफा किया जाएगा। जिससे यमुना में अशोधित सीवेज का पानी छोड़े जाने से रोका जा सके। अभी यमुना में 800 एमजीडी पानी छोड़ा जा रहा है। जबकि पहले यह मात्रा 450 एमजीडी बताई गई थी।
जल मंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली जल बोर्ड का पानी के बिल के रूप में लोगों पर एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि बकाया है। इसमें से सबसे ज्यादा 66 हज़ार करोड़ रुपए व्यावसायिक मीटर लगवाने वालों पर बकाया हैं। इनमें दुकान, फैक्ट्री, स्कूल व अस्पताल वाले शामिल हैं। सरकारी विभागों पर भी 61 हज़ार करोड़ रुपए बकाया हैं। जबकि घरेलू मीटर लगवाने वालों को भी दिल्ली जल बोर्ड के 15 हज़ार करोड़ रुपए देने हैं। लेकिन जल मंत्री ने इस बात का कोई खुलासा नहीं किया कि इतनी बड़ी राशि को वसूलने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। क्या सरकार जुर्माना माफी की कोई योजना लाएगी। ताकि लोग अपनी स्वेच्छा से बकाया राशि अदा करने के लिए आगे आ सकें।
अमित शाह के यमुना सफाई पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाने और दिल्ली सरकार को स्पष्ट निर्देश देने से यह बात एक बार फ़िर से साबित हो गई कि यमुना सफाई जैसी महत्वपूर्ण परियोजना पर केंद्र सरकार अपना पूरा नियंत्रण रखेगी। क्योंकि उसे इस मामले में दिल्ली की अनुभवहीन रेखा सरकार की काबिलियत पर अभी भरोसा नहीं।
मैंने तो अपने इसी कालम में कई बार इस बात का जिक्र किया है कि दिल्ली सरकार के तमाम नीतिगत फैसले व नियुक्तियां केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर लिए जाते हैं। हो सकता है कि अब रेखा सरकार के उन मंत्रियों को यह बात अच्छी तरह से समझ में आ जाएगी कि दिल्ली एक केंद्र शासित राज्य है न कि पूर्ण राज्य। इसलिए उन्हें दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री की बराबरी करने के लिए बयान देकर अपनी सरकार को परेशानी में डालने से बचना चाहिए l