राहुल गांधी ने तो अपना काम कर दिया

" आलोक गौड़ " 

" कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर 
ना  काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर l "
 
 
नई दिल्ली l लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से वोट चोरी करने के मुद्दे पर संपूर्ण विपक्ष को एकजुट कर अपना काम कर दिया है, अब यह विपक्षी दलों के साथ ही देश की जनता पर निर्भर करेगा कि वह अपने मताधिकार की रक्षा करने के लिए क्या कदम उठाती है l
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी की ओर से अंग्रेजों के खिलाफ शुरू किए गए भारत छोडो आंदोलन की पूर्व संध्या पर लोगों के मताधिकार की रक्षा करने के लिए जो पहल शुरू की थी, उसके सुखद परिणाम सामने आए हैं l राहुल गांधी के प्रयास की वजह से न केवल संपूर्ण विपक्ष एकजुट हुआ बल्कि उसने उनके नेतृत्व में प्रदर्शन में भाग लेकर यह भी मान लिया कि वही विपक्ष के नेता हैं l इस प्रदर्शन में तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी व राष्ट्रवादी कांग्रेस के भी प्रतिनिधि शामिल हुए l
विपक्ष की एकता को देखकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के कानों पर जूं अवश्य रेंगेगी l  दरअसल राहुल गांधी का केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर यह हमला महज राजनीतिक महत्वाकांक्षा से किया गया हमला नहीं है, बल्कि संविधान और मतदाताओं के  मताधिकार की रक्षा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है l
उनके इस कदम के बारे में यह शेर पूरी तरह से मौजूं है कि "मैं अकेला ही चला था, जानिब-ए-मंजिल मगर,  लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया" l
अब हालत यह है कि तमाम विपक्षी दलों के नेताओं को भी यह समझ में आ गया है कि वोट चोरी के मामले की लड़ाई न तो कांग्रेस पार्टी की है और न ही राहुल गांधी की, वोट की यह चोरी न रोकी गई तो किसी भी राजनीतिक दल का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा l
वैसे तो वोट चोरी और इवीएम के  जरिए चुनाव जीतने का मुद्दा राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद भी उठाया था, क्योंकि तमाम चुनावी सर्वेक्षण और राजनीतिक विश्लेषकों की राय के विपरीत भारतीय जनता पार्टी सत्ता पर काबिज होने में सफल हो गई थी l यह बात दीगर है कि उसे सरकार बनाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू की पार्टी की बैसाखी का सहारा लेना पड़ा l
यह बात भी सही है कि चुनाव आयोग की भूमिका और इवीएम के जरिए भारतीय जनता पार्टी के चुनाव जीतने को लेकर तमाम विपक्षी दल समय समय पर अपनी आवाज उठाते रहें हैं, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने जिस तरह से बिहार विधानसभा के चुनाव से ठीक पहले वहां की मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराने का अभियान चलाया और लगभग 67 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं l उसकी वजह से  विपक्षी दलों ने इसे भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जिताने की विशेष मुहिम करार दिया है l
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के मुताबिक वोट चोरी कोई अचानक घटित होने वाली घटना नहीं है, यह केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से की जा रही एक सुनियोजित साजिश है l
उनके मुताबिक इवीएम प्रबंधन के जरिए चुनाव परिणाम को प्रभावित किया जा रहा है, ऐसा करके न केवल चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों बल्कि मतदाताओं के साथ भी छल किया जा रहा है l
उन्होंने 2019 में हुए लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि इन चुनावों में सर्वाधिक मतदान प्रतिशत 67.40 दर्ज किया गया था, 11 राज्यों में इवीएम खराब होने या गायब होने की शिकायतें दर्ज करवाईं गई थीं, मगर उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई l
इसी प्रकार हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी भारी पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी l
सवाल राहुल गांधी या विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे मुद्दे का नहीं बल्कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का भी है, अगर चुनाव ही निष्पक्ष नहीं होंगे तो फिर लोकतंत्र कैसे बचेगा l