गड्ढे भरने को भी सरकार इवेंट के रूप में पेश कर रही है
" आलोक गौड़ "
" कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर। "
नई दिल्ली। रेखा गुप्ता सरकार ने एक दिन के भीतर लगभग 1400 किलोमीटर लंबी सड़कों पर बने 3433 गड्ढों को भरने का दावा करने के साथ ही इसे एक कीर्तिमान बताया है।
सरकार ने इसे मानसून से निपटने की तैयारियों का हिस्सा बताया है। सरकार का यह भी कहना है कि गड्ढे भरने की पूरी प्रक्रिया मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और लोक निर्माण मंत्री परवेश साहिब सिंह की निगरानी में पूरी की। सरकार की ओर से यह दावा भी किया गया है कि गड्ढे भरते समय गुणवत्ता का खास ध्यान रखा गया है।
सरकार की ओर से बताया गया है कि इन गड्ढों की पहचान जन शिकायतों, ड्रोन मैपिंग और लोक निर्माण विभाग की क्षेत्रीय सर्वेक्षण जरिए की गई थी।
गड्ढे भरने के इस अभियान में 70 सहायक अभियंता, 150 कनिष्ठ अभियंता, एक हजार श्रमिक व पर्यवेक्षकों ने हिस्सा लिया।
सरकार की ओर से मुख्य सड़कों, कालोनियों की गलियों और संवेदनशील जिन स्थानों पर गड्ढे भरने और बरसात के दौरान लोगों को परेशानी न होने का दावा किया है, उसकी सच्चाई का पता तो दिल्ली में झमाझम बारिश होने के बाद ही लगेगा। वैसे कहावत के पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। इसी के अनुसार मानसून की तैयारियों के संबंध में सरकार की ओर से किए गए तमाम दावों पोल मानसून से पहले थोड़े समय के लिए हुई बारिश ने ही खोल दी। जब न केवल मिंटो ब्रिज में गाड़ियां फंस गई थीं बल्कि जगह जगह जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में निर्वाचित सरकार का कर्तव्य है कि वह लोगों को बुनियादी नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने के साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान भी करे। ऐसे में दिल्ली सरकार की ओर से मात्र सड़कों के गड्ढे भरने को इवेंट बना देना और उसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करना समझ से परे है।
हां अगर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके लोक निर्माण मंत्री परवेश साहिब सिंह सड़क बनाने के काम में होने वाले भ्रष्टाचार व घोटाले पर रोक लगाने में जिस दिन कामयाब हो जाएंगे तो स्वत: ही प्रशंसा के पात्र होंगे।
अभी तक होता यह आया है सड़क बनाने के काम में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की जाती है। सड़क बनाने का ठेका लेने वाला ने उचित मोटाई की सड़क बनाता है और न ही उसके निर्माण में गुणवत्ता पूर्ण सामग्री का उपयोग करता है। इतना ही रोड़ी में सही मात्रा में तारकोल भी नहीं मिलाया जाता है। नतीजा ऐसी सड़कें बारिश का एक भी दवाब नहीं झेल पाती हैं और खराब हो जाती हैं। जिसकी वजह से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
दिलचस्प और हैरानी की बात तो यह है कि दिल्ली सरकार के जिस लोक निर्माण विभाग के
70 सहायक अभियंता और 150 कनिष्ठ अभियंता केवल गड्ढे भरने के लिए सड़कों पर उतर आए, उनमें से एक भी सड़क निर्माण के दौरान नजर नहीं आता। अगर यह लोग अपना काम ईमानदारी से पूरा करते तो न सड़कों पर गड्ढे पढ़ते और न ही रेखा सरकार को इसे इवेंट बनाने की जरूरत पेश आती।


RashtriyaPravakta