बांग्लादेश में सत्ता समीकरण बदलने की आहट, पाकिस्तान समर्थक इस्लामिक पार्टी के सरकार बनाने की संभावना पर चर्चा

बांग्लादेश में सत्ता समीकरण बदलने की आहट, पाकिस्तान समर्थक इस्लामिक पार्टी के सरकार बनाने की संभावना पर चर्चा

ढाका, 22 जनवरी 2026 । बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर सत्ता समीकरण बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा है कि आने वाले समय में पाकिस्तान समर्थक मानी जाने वाली एक इस्लामिक पार्टी देश में सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है। हालांकि यह अभी संभावना और राजनीतिक आकलन के स्तर पर है, लेकिन मौजूदा हालात, गठबंधन राजनीति और जनमत के बदलते रुझान इस बहस को हवा दे रहे हैं।

बांग्लादेश में अगले महीने होने वाले आम चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। लंबे समय तक राजनीति से बाहर रही पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी पहली बार सरकार बनाने के बेहद करीब पहुंचती नजर आ रही है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक हाल ही में हुए दो अलग-अलग सर्वे में जमात देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को कड़ी टक्कर दे रही है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को 300 सीटों संसदीय पर आम चुनाव होंगे।

जमात-ए-इस्लामी वही पार्टी है जिसने 1971 में बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था और पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। देश की आजादी के बाद 1972 में इस पर बैन लगा दिया गया था। यह बैन 1975 में हटाया गया और 1979 में जियाउर रहमान के शासन में पार्टी को चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिली।

पाकिस्तान समर्थक माने जाने वाले इन दलों पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि वे क्षेत्रीय राजनीति में वैचारिक झुकाव और विदेश नीति को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। यदि ऐसे किसी दल या गठबंधन की सरकार बनती है, तो इसका असर सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर नई चुनौतियां उभरने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, बांग्लादेश की राजनीति में सत्ता तक पहुंचने के लिए गठबंधन की भूमिका बेहद अहम रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी इस्लामिक पार्टी के लिए अकेले बहुमत हासिल करना कठिन होगा, लेकिन यदि वह अन्य विपक्षी दलों या असंतुष्ट समूहों के साथ समझौता करती है, तो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। वहीं, सत्तारूढ़ खेमे का कहना है कि देश की जनता अब भी धर्मनिरपेक्षता और विकास को प्राथमिकता देती है।

फिलहाल यह साफ है कि बांग्लादेश की राजनीति एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है। आने वाले चुनाव, गठबंधन वार्ताएं और जनभावनाएं यह तय करेंगी कि सत्ता किसके हाथ में जाती है। पाकिस्तान समर्थक इस्लामिक पार्टी के सरकार बनाने की संभावना भले ही अभी अटकलों में हो, लेकिन इस चर्चा ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।