नेशनल हाईवे पर अब आधा टोल लगेगा: सरकार ने संरचनाओं वाले हाईवे सेक्शन पर 50% छूट का एलान किया
नई दिल्ली,। 05 जुलाई 2025। सरकार ने नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स में 50% तक की कटौती की है। यह कटौती विशेष रूप से उन हाईवे पर हुई है जहां ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड स्ट्रेच मौजूद हैं। यहां यात्रा करने के लिए अब कम टोल चुकाना होगा। इससे सफर की लागत घटेगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने नेशनल हाईवे पर नए संशोधन अधिसूचना के जरिए बड़े बदलाव किए हैं। अब पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड स्ट्रेच वाले सेक्शन पर टोल चार्ज केवल 50% तक ही लिया जाएगा—पहले जहां ये 10 गुना वसूला जाता था, वहीं अब यह सीमा पांच गुना पर आ गई है,
नया फॉर्मूला: दो विकल्पों में से जो कम हो:
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संरचना की लंबाई का 10× + बाकी सड़क की सामान्य लंबाई।
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पूरे सेक्शन की लंबाई × 5।
उदाहरण: अगर पूरी संरचना का हिस्सा 40 किमी है, तो 10×40 = 400 या 5×40 = 200। अब टोल केवल 200 किमी की दर से लगेगा, यानी 50% तक की कटौती हुई।
किसको फायदा?
यह संशोधन विशेषकर शहरों के आसपास के एक्सप्रेसवे, रिंग रोड्स, बाइपास—जैसे द्वारका एक्सप्रेसवे—जैसे संरचनात्मक हाईवे सेक्शन में सफर करने वाले निजी और व्यावसायिक वाहनों के लिए राहत देगा।
आधिकारिक स्थिति:
मंजूरी 2 जुलाई 2025 को दी गई और नीतिगत बदलाव प्रभावी भी हो चुका है।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
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संरचनात्मक लागत: पहले संरचनात्मक सेक्शन पर टोल 10× लेकर निर्माण लागत वसूलने की रणनीति थी—लेकिन अब यह अधिक बोझ साबित हो रही थी।
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यात्री और व्यापारिक मदद: लागत कम होने से आम यात्रियों और लॉजिस्टिक ऑपरेटरों को लाभ पहुँचेगा, खासकर लंबे दूरी और शहरों के आसपास के मार्गों पर।
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सरकार की नई नीति: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पहले से ही कहा था कि एक समान और पारदर्शी टोल नीति बनाने की दिशा में काम चल रहा है—यह कदम उसी पहल का हिस्सा है।
यह फैसला राष्ट्रीय राजमार्गों को यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत है—विशेषकर उन मार्गों पर जहाँ संरचनात्मक निर्माण की ज़्यादा हिस्सेदारी रहती है। अब, जो मार्ग तकनीकी रूप से महंगे हैं, वहाँ भी यात्रियों को 50 % तक की छूट मिलेगी और आने वाले समय में पारदर्शिता व सुविधाएं बढ़ा दी जाएंगी।


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