ट्रम्प का बड़ा दावा—ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए सेना भेजने से भी पीछे नहीं हटेंगे
वॉशिंगटन, 07 जनवरी 2026 । अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रम्प के बयान ने हलचल मचा दी है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि राष्ट्रीय हितों की बात आए तो अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के लिए सैन्य विकल्प पर भी विचार कर सकता है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात कही है। BBC के मुताबिक व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने मंगलवार को इसे अमेरिकी सुरक्षा के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम इसे साकार करने के कई तरीके तलाश रही है, जिनमें सैन्य बल का इस्तेमाल भी शामिल है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प ने सोमवार को कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड बहुत जरूरी है। वहां पर रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी चिंता की बात है। उन्होंने कहा था कि वह 20 दिन में ग्रीनलैंड पर बात करेंगे।
ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक स्वायत्त इलाका है, जो NATO का हिस्सा भी है। यहां पर डेनमार्क के करीब 200 सैनिक तैनात हैं।
ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, प्राकृतिक संसाधनों और सामरिक स्थिति के कारण वैश्विक शक्तियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां दुर्लभ खनिज, ऊर्जा संसाधन और आर्कटिक समुद्री मार्गों पर नियंत्रण जैसी अहम संभावनाएं मौजूद हैं। ट्रम्प के अनुसार, अगर अमेरिका इन क्षेत्रों में पीछे रहा तो भविष्य में उसकी सुरक्षा और आर्थिक हितों को नुकसान हो सकता है।
हालांकि, ट्रम्प के इस बयान को कई विशेषज्ञ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी संप्रभु या स्वायत्त क्षेत्र पर सैन्य कब्जा गंभीर विवाद और टकराव को जन्म दे सकता है। डेनमार्क और यूरोपीय देशों की ओर से पहले ही संकेत मिल चुके हैं कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
अमेरिका के भीतर भी ट्रम्प के इस रुख को लेकर मतभेद हैं। कुछ समर्थक इसे मजबूत राष्ट्रवादी सोच बता रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान वैश्विक तनाव को बढ़ा सकते हैं और अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खासकर नाटो सहयोगियों के साथ रिश्तों पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, ट्रम्प का ग्रीनलैंड को लेकर यह बयान केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित करने वाला विषय बन सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि यह बयान चुनावी रणनीति तक सीमित रहता है या वाकई अमेरिकी नीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।


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