ट्रम्प ने दिए परमाणु हथियारों की टेस्टिंग के आदेश — वैश्विक सुरक्षा और शस्त्र नियंत्रण पर उठे गंभीर सवाल

ट्रम्प ने दिए परमाणु हथियारों की टेस्टिंग के आदेश — वैश्विक सुरक्षा और शस्त्र नियंत्रण पर उठे गंभीर सवाल

वॉशिंगटन , 30 अक्टूबर 25 । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने परमाणु हथियारों की टेस्टिंग (Nuclear Weapons Testing) को फिर से शुरू करने का आदेश दिया है — यह कदम न केवल अमेरिका की रक्षा नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और परमाणु शस्त्र नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल सकता है।

सूत्रों के अनुसार, यह फैसला अमेरिकी रक्षा विभाग की सलाह पर लिया गया है, जिसमें यह तर्क दिया गया कि रूस और चीन ने गुप्त रूप से परमाणु परीक्षणों को फिर से शुरू किया है। ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि अमेरिका को अपनी "रणनीतिक बढ़त" (Strategic Edge) बनाए रखने के लिए ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) को परमाणु हथियारों की तुरंत टेस्टिंग शुरू करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह टेस्टिंग चीन और रूस के बराबर होनी चाहिए।

अमेरिका ने आखिरी बार 23 सितंबर 1992 को परमाणु परीक्षण किया था। यह अमेरिका की 1,030वीं टेस्टिंग थी। टेस्टिंग रेनियर मेसा पहाड़ी के 2300 फीट नीचे नेवादा टेस्ट साइट पर की गई, ताकि रेडिएशन बाहर न फैले। इसका कोडनेम था- डिवाइडर।

विस्फोट जमीन के नीचे इतनी जोर से हुआ कि नीचे की चट्टानें पिघल गई थीं। जमीन की सतह लगभग 1 फुट ऊपर उठकर फिर धंस गई। वहां अभी भी 150 मीटर चौड़ा और 10 मीटर गहरा गड्ढ़ा दिखाई देता है।

गौरतलब है कि 1996 में हुए ‘कम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी’ (CTBT) के तहत भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगा दी गई थी। चीन और अमेरिका दोनों ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं, लेकिन अभी तक इसे औपचारिक रूप से मंजूरी नहीं दी है।

जॉर्ज बुश ने परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाई

पूर्ण परमाणु हथियार परीक्षण (फुल न्यूक्लियर वीपन टेस्ट) में असली वास्तविक परमाणु बम का विस्फोट किया जाता है ताकि उसकी विनाशक क्षमता, रेडिएशन प्रभाव, और तकनीकी दक्षता मापी जा सके। इस परीक्षण में परमाणु प्रतिक्रिया होती है।

ऐसे परीक्षण आमतौर पर जमीन के अंदर या आकाश में किए जाते थे। यह बहुत बड़ा पर्यावरणीय और राजनीतिक मुद्दा होता है, क्योंकि इससे रेडिएशन फैलने का खतरा होता है।

आखिरी बार 1992 में परमाणु परीक्षण करने के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने की घोषणा की थी।

राजनैतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला अंतरराष्ट्रीय शक्ति समीकरण को प्रभावित कर सकता है। इससे रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों को भी परमाणु परीक्षणों की ओर प्रेरित करने का खतरा बढ़ेगा, जिससे दुनिया में नए परमाणु हथियारों की दौड़ (Nuclear Arms Race) शुरू हो सकती है।

ट्रम्प प्रशासन ने अपने बयान में कहा है कि यह कदम “केवल सुरक्षा की दृष्टि से” उठाया गया है और इसका उद्देश्य किसी देश को धमकाना नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अमेरिकी घरेलू राजनीति और रक्षा उद्योग को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि परमाणु परीक्षणों से हथियार निर्माण और अनुसंधान में नई गति आएगी।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब राजनयिक हस्तक्षेप और वार्ता के माध्यम से इस तनावपूर्ण स्थिति को शांत करने की अपील कर रहा है।
यदि इस आदेश को पूरी तरह लागू किया गया, तो यह शीत युद्ध के बाद वैश्विक परमाणु नीति में सबसे बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।